Holi Ke Rang, Rajasthan Ke Sang: 13 Unique Types of Holi Celebrations You Must See
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GK Fact
🕒 03 Mar 2026
Holi Ke Rang, Rajasthan Ke Sang: 13 Unique Types of Holi Celebrations You Must See
राजस्थान में खेले जाने वाली प्रसिद्ध होली की सूची:
पत्थरमार होली: यह होली बाड़मेर व डूंगरपुर क्षेत्र में खेली जाती है, जहाँ रंगों के साथ-साथ छोटे पत्थरों से होली खेलने की परंपरा है।
लठमार होली: भरतपुर एवं करौली में खेली जाने वाली इस होली में महिलाएं पुरुषों पर प्रेमपूर्वक लाठियां बरसाती हैं और पुरुष ढाल से अपना बचाव करते हैं।
कोड़ामार होली: भिनाय (अजमेर) व श्रीगंगानगर में यह होली खेली जाती है, जिसमें कपड़े के कोड़े बनाकर एक-दूसरे पर वार किया जाता है।
फूलों की होली: गोविंद देव जी मंदिर, जयपुर में भगवान कृष्ण के साथ यह बेहद खूबसूरत और मनमोहक होली केवल रंग-बिरंगे फूलों से खेली जाती है।
रम्मत मंचन: बीकानेर क्षेत्र में होली के अवसर पर 'रम्मत' (एक प्रकार का लोक नाट्य) का आयोजन किया जाता है।
चंग व गैर नृत्य: शेखावाटी क्षेत्र में होली पर चंग की थाप के साथ पारंपरिक 'गैर नृत्य' किया जाता है, जो देखने में बेहद आकर्षक होता है।
रोने-बिलखने वाली होली: यह एक बहुत ही अलग प्रकार की परंपरा है जो जोधपुर में मनाई जाती है।
गोबर के कंडों की होली: गलियाकोट, डूंगरपुर में रंगों की जगह गाय के गोबर से बने कंडों (उपलों) का इस्तेमाल कर होली खेली जाती है।
देवर-भाभी की होली: ब्यावर में देवर और भाभी के बीच हंसी-ठिठोली और मस्ती से भरी यह खास होली खेली जाती है।
हरण की होली: यह विशेष प्रकार की होली सांगोद (कोटा) में मनाई जाती है।
डंडों की मार होली: बीकानेर में लठमार होली की तरह ही डंडों से होली खेली जाती है।
कंकड़मार होली: स्वर्ण नगरी जैसलमेर में छोटे-छोटे कंकड़ उछालकर होली खेलने की प्राचीन परंपरा है।
अंगारों की होली: केकड़ी (अजमेर) की यह होली सबसे प्रसिद्ध है, जहाँ लोग अंगारों पर चलकर या उनसे होली खेलकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं।
पत्थरमार होली: यह होली बाड़मेर व डूंगरपुर क्षेत्र में खेली जाती है, जहाँ रंगों के साथ-साथ छोटे पत्थरों से होली खेलने की परंपरा है।
लठमार होली: भरतपुर एवं करौली में खेली जाने वाली इस होली में महिलाएं पुरुषों पर प्रेमपूर्वक लाठियां बरसाती हैं और पुरुष ढाल से अपना बचाव करते हैं।
कोड़ामार होली: भिनाय (अजमेर) व श्रीगंगानगर में यह होली खेली जाती है, जिसमें कपड़े के कोड़े बनाकर एक-दूसरे पर वार किया जाता है।
फूलों की होली: गोविंद देव जी मंदिर, जयपुर में भगवान कृष्ण के साथ यह बेहद खूबसूरत और मनमोहक होली केवल रंग-बिरंगे फूलों से खेली जाती है।
रम्मत मंचन: बीकानेर क्षेत्र में होली के अवसर पर 'रम्मत' (एक प्रकार का लोक नाट्य) का आयोजन किया जाता है।
चंग व गैर नृत्य: शेखावाटी क्षेत्र में होली पर चंग की थाप के साथ पारंपरिक 'गैर नृत्य' किया जाता है, जो देखने में बेहद आकर्षक होता है।
रोने-बिलखने वाली होली: यह एक बहुत ही अलग प्रकार की परंपरा है जो जोधपुर में मनाई जाती है।
गोबर के कंडों की होली: गलियाकोट, डूंगरपुर में रंगों की जगह गाय के गोबर से बने कंडों (उपलों) का इस्तेमाल कर होली खेली जाती है।
देवर-भाभी की होली: ब्यावर में देवर और भाभी के बीच हंसी-ठिठोली और मस्ती से भरी यह खास होली खेली जाती है।
हरण की होली: यह विशेष प्रकार की होली सांगोद (कोटा) में मनाई जाती है।
डंडों की मार होली: बीकानेर में लठमार होली की तरह ही डंडों से होली खेली जाती है।
कंकड़मार होली: स्वर्ण नगरी जैसलमेर में छोटे-छोटे कंकड़ उछालकर होली खेलने की प्राचीन परंपरा है।
अंगारों की होली: केकड़ी (अजमेर) की यह होली सबसे प्रसिद्ध है, जहाँ लोग अंगारों पर चलकर या उनसे होली खेलकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं।
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