MDSU B.A. 3rd Year Semester 5 History (आधुनिक भारत का इतिहास, आधुनिक राजस्थान और विश्व धरोहर) important questions and answers in Hindi. Read 50-word short notes and 400-word study headings to score full marks in your university exams.
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MDSU B.A. 5th Semester History Important Questions & Answers (आधुनिक भारत का इतिहास, आधुनिक राजस्थान और विश्व धरोहर)
MDSU Ajmer BA 3rd Year (Semester-5) History के महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर यहाँ उपलब्ध हैं। ये सभी प्रश्न परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों के आधार पर तैयार किए गए हैं। छात्र इन प्रश्नों को पढ़कर अपनी परीक्षा की तैयारी को और बेहतर बना सकते हैं।
भाग-अ: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Part-A: Short Answers)
निर्देश: प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 50 शब्दों में दें। प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का है।
1. प्लासी के युद्ध (1757) का भारतीय इतिहास में क्या महत्व है?
प्लासी का युद्ध बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला और ईस्ट इंडिया कंपनी (रॉबर्ट क्लाइव) के बीच लड़ा गया था। इस युद्ध में नवाब की हार के साथ ही भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की राजनीतिक नींव पड़ी और बंगाल की लूट शुरू हुई।
2. 1857 की क्रांति के किन्हीं दो प्रमुख कारणों का उल्लेख कीजिए।
1857 की क्रांति के दो प्रमुख कारण थे: 1. डलहौजी की ‘गोद निषेध नीति’ (हड़प नीति) जिसके कारण राजाओं में भारी असंतोष था, और 2. सैनिकों को चर्बी वाले कारतूस (गाय और सूअर की चर्बी) का प्रयोग करने के लिए मजबूर करना।
3. ‘स्वदेशी आंदोलन’ (1905) का मुख्य उद्देश्य क्या था?
लॉर्ड कर्जन द्वारा 1905 में किए गए ‘बंगाल विभाजन’ का विरोध करने के लिए स्वदेशी आंदोलन चलाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी वस्तुओं और कपड़ों का बहिष्कार करना और स्वदेशी (भारत में बनी) वस्तुओं को बढ़ावा देना था।
4. मराठों के राजस्थान में प्रवेश का सबसे पहला और मुख्य कारण क्या था?
राजस्थान में मराठों का प्रवेश मुख्य रूप से राजपूत राजाओं के आपसी उत्तराधिकार के झगड़ों (जैसे बूंदी और जयपुर का विवाद) के कारण हुआ। राजपूत राजाओं ने अपनी गद्दी बचाने के लिए मराठों को पैसे देकर सहायता के लिए बुलाया था।
5. राजस्थान में 1857 की क्रांति की शुरुआत कहाँ से हुई थी?
राजस्थान में 1857 की क्रांति की शुरुआत 28 मई 1857 को ‘नसीराबाद छावनी’ (अजमेर) से हुई थी। यहाँ 15वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री के सैनिकों ने विद्रोह कर दिया और अंग्रेज अधिकारियों पर हमला कर दिया।
6. ‘प्रजामंडल आंदोलन’ का राजस्थान के इतिहास में क्या योगदान है?
देशी रियासतों में राजाओं के तानाशाही शासन को समाप्त कर जनता द्वारा चुनी गई सरकार (उत्तरदायी शासन) की स्थापना करने और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रजामंडल आंदोलन चलाए गए थे।
7. यूनेस्को द्वारा ‘विश्व सांस्कृतिक धरोहर’ का दर्जा क्यों दिया जाता है?
यूनेस्को यह दर्जा विश्व के उन स्मारकों, इमारतों या स्थलों को देता है जो मानव जाति की कला, वास्तुकला और इतिहास के अद्वितीय और उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इसका उद्देश्य इन धरोहरों को नष्ट होने से बचाना है।
8. सांची के स्तूप की वास्तुकला की एक प्रमुख विशेषता बताइए।
मध्य प्रदेश में स्थित सांची का स्तूप सम्राट अशोक द्वारा बनवाया गया था। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसके चार भव्य प्रवेश द्वार (तोरण द्वार) हैं, जिन पर महात्मा बुद्ध के जीवन की कथाओं (जातक कथाओं) को अत्यंत सुंदरता से उकेरा गया है।
9. अजंता और एलोरा की गुफाओं में मूल अंतर क्या है?
अजंता की गुफाएं (महाराष्ट्र) मुख्य रूप से अपनी अद्भुत ‘भित्ति चित्रकला’ (दीवारों पर बने चित्रों) और केवल बौद्ध धर्म से संबंधित होने के लिए प्रसिद्ध हैं। जबकि एलोरा की गुफाएं मूर्तिकला (जैसे कैलाश मंदिर) और हिंदू, बौद्ध तथा जैन तीनों धर्मों से संबंधित होने के लिए जानी जाती हैं।
10. खजुराहो के मंदिरों की निर्माण शैली कौन-सी है?
मध्य प्रदेश में चंदेल शासकों द्वारा बनवाए गए खजुराहो के मंदिर ‘नागर शैली’ के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं। ये मंदिर एक ऊंचे चबूतरे पर बने हैं और अपनी बाहरी दीवारों पर बनी अत्यंत सुंदर और जीवंत मूर्तियों के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं।
भाग-ब: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Part-B: Descriptive Questions – Study Notes)
निर्देश: इन प्रश्नों के उत्तर 400 शब्दों में दें। प्रत्येक प्रश्न 10 अंक का है। परीक्षा में पूरे अंक प्राप्त करने के लिए उत्तर में निम्नलिखित शीर्षकों का प्रयोग करें:
1. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की आर्थिक नीतियों (1757-1857) और भारत की अर्थव्यवस्था पर उनके विनाशकारी प्रभावों का सविस्तार वर्णन कीजिए।
- प्रस्तावना: व्यापार करने के बहाने आई ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत की आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पूरी तरह नष्ट कर दिया।
- विनाशकारी भू-राजस्व नीतियाँ:
- अंग्रेजों ने लगान (टैक्स) वसूलने के लिए स्थायी बंदोबस्त (जमींदारी), रैयतवाड़ी और महालवाड़ी जैसी क्रूर व्यवस्थाएं लागू कीं।
- किसानों से पैदावार का 50% से 80% तक हिस्सा छीन लिया जाता था। लगान न चुका पाने पर किसानों की जमीन नीलाम कर दी जाती थी, जिससे वे मजदूर बन गए।
- हस्तशिल्प और उद्योगों का विनाश:
- भारत के सूती कपड़े और रेशम दुनिया में सबसे उत्तम माने जाते थे। अंग्रेजों ने भारत के कारखानों को नष्ट करने के लिए भारतीय माल पर भारी टैक्स लगा दिया।
- इंग्लैंड की मशीनों से बना सस्ता कपड़ा भारत के बाजारों में भर दिया गया, जिससे लाखों भारतीय बुनकर और कारीगर बेरोजगार हो गए और भूख से मरने लगे।
- धन का निष्कासन (Drain of Wealth): दादाभाई नौरोजी ने बताया कि अंग्रेज भारत का धन लूटकर इंग्लैंड ले जा रहे थे, जिसके बदले में भारत को कुछ नहीं मिल रहा था।
2. 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के स्वरूप, असफलता के कारणों और इसके दूरगामी परिणामों का मूल्यांकन कीजिए।
- प्रस्तावना: 1857 का विद्रोह केवल एक सैनिक गदर (विद्रोह) नहीं था, बल्कि यह विदेशी शासन के खिलाफ भारतीयों का पहला महान स्वतंत्रता संग्राम था।
- विद्रोह का स्वरूप: वीर सावरकर ने इसे ‘भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम’ कहा है। इसमें सैनिकों के साथ-साथ किसानों, जमींदारों और राजाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया था।
- असफलता के कारण:
- कुशल नेतृत्व का अभाव: विद्रोहियों के पास अंग्रेजों जैसे योग्य सेनापति और आधुनिक हथियार नहीं थे।
- एकता की कमी: भारत के कई राजाओं (जैसे सिंधिया और होल्कर) ने अंग्रेजों का साथ दिया और विद्रोह को कुचलने में मदद की।
- समय से पहले शुरुआत: योजना के अनुसार विद्रोह 31 मई को होना था, लेकिन यह 10 मई को ही भड़क गया, जिससे सभी जगह एक साथ क्रांति नहीं हो सकी।
- दूरगामी परिणाम:
- भारत से ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर दिया गया और भारत का शासन सीधे ब्रिटिश महारानी के हाथ में आ गया।
- अंग्रेजों ने ‘फूट डालो और राज करो’ की खतरनाक नीति अपनानी शुरू कर दी।
3. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में महात्मा गांधी के योगदान और उनके द्वारा चलाए गए प्रमुख जन आंदोलनों की विवेचना कीजिए।
- प्रस्तावना: 1915 में दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद महात्मा गांधी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पूरी दिशा ही बदल दी। उन्होंने सत्य और अहिंसा को अपना हथियार बनाया।
- प्रमुख जन आंदोलन:
- असहयोग आंदोलन (1920): गांधी जी ने जनता से अपील की कि वे अंग्रेजों का सहयोग करना बंद कर दें। विद्यार्थियों ने स्कूल छोड़ दिए, वकीलों ने अदालतें छोड़ दीं और विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई। (चौरी-चौरा की हिंसक घटना के कारण इसे रोकना पड़ा)।
- सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930): यह आंदोलन ‘दांडी मार्च’ से शुरू हुआ, जहाँ गांधी जी ने समुद्र तट पर नमक बनाकर अंग्रेजों का नमक कानून तोड़ा।
- भारत छोड़ो आंदोलन (1942): द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान गांधी जी ने ‘करो या मरो’ का नारा दिया और अंग्रेजों को भारत छोड़ने की अंतिम चेतावनी दी।
- निष्कर्ष: गांधी जी ने कांग्रेस को अमीरों की संस्था से निकालकर एक जन-संगठन बना दिया, जिसमें किसानों और महिलाओं ने भी भारी संख्या में भाग लिया।
4. राजस्थान में मराठों के प्रवेश (1710-1775) और उसके राजनीतिक व आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
- प्रस्तावना: अठारहवीं सदी में जब मुगल साम्राज्य कमजोर हो रहा था, तब राजस्थान के राजपूत राजाओं के आपसी झगड़ों ने मराठों को राजस्थान में घुसपैठ करने का सुनहरा मौका दे दिया।
- मराठों का प्रवेश और सिंधिया का प्रभाव:
- मराठों ने सबसे पहले बूंदी रियासत के उत्तराधिकार संघर्ष में हस्तक्षेप किया। इसके बाद वे जयपुर और जोधपुर के मामलों में भी दखल देने लगे।
- महादजी सिंधिया जैसे शक्तिशाली मराठा सरदारों ने राजस्थान पर भारी नियंत्रण स्थापित कर लिया था (1761-1794)।
- मराठों के प्रवेश के प्रभाव:
- आर्थिक विनाश: मराठों ने ‘चौथ’ और ‘सरदेशमुखी’ के अलावा राजपूत राजाओं से भारी मात्रा में ‘खिराज’ (कर) वसूला। बार-बार के आक्रमणों और लूटमार से राजस्थान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो गई।
- राजनीतिक पतन: लगातार युद्धों और कर चुकाने के कारण राजपूत रियासतें इतनी कमजोर हो गईं कि उन्हें मराठों के आतंक से बचने के लिए मजबूर होकर ईस्ट इंडिया कंपनी (अंग्रेजों) के साथ सहायक संधियाँ (1818) करनी पड़ीं।
5. राजस्थान के एकीकरण के विभिन्न चरणों को समझाते हुए आधुनिक राजस्थान के निर्माण की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
- प्रस्तावना: आजादी के समय राजस्थान 19 रियासतों, 3 ठिकानों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में बंटा हुआ था। इसका एकीकरण (Integration) एक बहुत जटिल और लंबी प्रक्रिया थी जो सात चरणों में पूरी हुई।
- एकीकरण के प्रमुख चरण:
- प्रथम चरण (मत्स्य संघ): 18 मार्च 1948 को अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली को मिलाकर मत्स्य संघ बनाया गया।
- द्वितीय चरण (राजस्थान संघ): 25 मार्च 1948 को कोटा, बूंदी, झालावाड़, बांसवाड़ा आदि 9 रियासतों को मिलाकर इसका निर्माण हुआ।
- तृतीय चरण (संयुक्त राजस्थान): 18 अप्रैल 1948 को राजस्थान संघ में उदयपुर (मेवाड़) रियासत का विलय किया गया।
- चतुर्थ चरण (वृहत् राजस्थान): 30 मार्च 1949 को जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर जैसी बड़ी रियासतों के शामिल होने से आधुनिक राजस्थान का खाका तैयार हुआ (इसी दिन राजस्थान दिवस मनाया जाता है)।
- अंतिम चरण (सातवाँ): 1 नवंबर 1956 को अजमेर-मेरवाड़ा और माउंट आबू को भी राजस्थान में मिला लिया गया, जिससे आज का राजस्थान बना।
6. भारत के प्रमुख विश्व सांस्कृतिक धरोहर स्थलों (आगरा का किला, फतेहपुर सीकरी और ताजमहल) की वास्तुकला और उनके ऐतिहासिक महत्व का वर्णन कीजिए।
- प्रस्तावना: यूनेस्को द्वारा भारत के कई ऐतिहासिक स्थलों को विश्व धरोहर घोषित किया गया है। इनमें मुगल काल की ये तीन इमारतें दुनिया भर के पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण हैं।
- आगरा का किला: सम्राट अकबर द्वारा लाल बलुआ पत्थर से बनवाया गया यह किला एक अभेद्य सैन्य दुर्ग होने के साथ-साथ एक सुंदर महल भी है। इसके भीतर जहाँगीरी महल और दीवान-ए-आम दर्शनीय हैं।
- फतेहपुर सीकरी: अकबर ने इसे अपनी नई राजधानी के रूप में बसाया था। यहाँ की इमारतें हिंदू और इस्लामी वास्तुकला का बेहतरीन मिश्रण हैं। गुजरात विजय के उपलक्ष्य में बनवाया गया विशाल ‘बुलंद दरवाजा’ और सूफी संत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह इसकी मुख्य पहचान हैं।
- ताजमहल: यमुना नदी के किनारे स्थित यह इमारत प्रेम का सबसे बड़ा प्रतीक है। शाहजहाँ ने इसे सफेद संगमरमर से अपनी पत्नी मुमताज की याद में बनवाया था। इसका विशाल मुख्य गुंबद, चारों कोनों पर खड़ी मीनारें और दीवारों पर कीमती पत्थरों की जड़ाई (पित्रा ड्यूरा) इसे दुनिया के सात अजूबों में शामिल करती है।
7. दक्षिण भारत के प्रमुख विश्व धरोहर स्थलों (महाबलीपुरम, तंजौर का बृहदेश्वर मंदिर और हम्पी) की स्थापत्य कला की विशेषताओं का सविस्तार विश्लेषण कीजिए।
- प्रस्तावना: दक्षिण भारत के मंदिर और खंडहर प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग और मूर्तिकला के ऐसे चमत्कार हैं जिन्हें यूनेस्को ने पूरी मानवता की धरोहर माना है।
- महाबलीपुरम (मामल्लपुरम) के स्मारक:
- पल्लव राजाओं द्वारा समुद्र के किनारे बनवाई गई ये इमारतें अपनी अनूठी रॉक-कट (चट्टान काटकर बनाई गई) वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध हैं।
- यहाँ एक ही विशाल पत्थर को तराशकर बनाए गए ‘रथ मंदिर’ (जैसे धर्मराज रथ) और ‘शोर मंदिर’ (तटीय मंदिर) पल्लव कला के बेजोड़ उदाहरण हैं।
- तंजौर का बृहदेश्वर मंदिर:
- चोल सम्राट राजराज प्रथम द्वारा बनवाया गया यह भगवान शिव का मंदिर ‘द्रविड़ शैली’ का शिखर है।
- इसका 13 मंजिला ऊंचा विमान (शिखर) इतना विशाल है कि इसके सबसे ऊपर रखा गया पत्थर 80 टन भारी है, जिसे बिना किसी आधुनिक क्रेन के वहाँ चढ़ाया गया था।
- हम्पी के स्मारक (विजयनगर साम्राज्य):
- कर्नाटक में तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित हम्पी, विजयनगर साम्राज्य की शानदार राजधानी के खंडहर हैं।
- यहाँ का ‘विरुपाक्ष मंदिर’ और ‘विट्ठल मंदिर’ अपनी बारीक नक्काशी और संगीतमय खंभों (जिनसे संगीत की ध्वनि निकलती है) के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं।
8. उन्नीसवीं शताब्दी के ‘सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों’ (विशेषकर ब्रह्म समाज और आर्य समाज) के कारणों और भारतीय समाज पर उनके प्रभावों की विस्तृत विवेचना कीजिए।
- प्रस्तावना: उन्नीसवीं सदी में भारतीय समाज कई प्रकार के अंधविश्वासों, रूढ़ियों और कुप्रथाओं (सती प्रथा, छुआछूत, बाल विवाह) की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। पाश्चात्य शिक्षा के संपर्क में आने के बाद भारतीय विचारकों ने समाज को जगाने के लिए जो प्रयास किए, उसे ‘भारतीय पुनर्जागरण’ कहा जाता है।
- ब्रह्म समाज (राजा राममोहन राय):
- राजा राममोहन राय को ‘आधुनिक भारत का जनक’ कहा जाता है। उन्होंने 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की।
- प्रमुख कार्य: उन्होंने मूर्ति पूजा और बहुदेववाद का विरोध किया। उनका सबसे बड़ा योगदान ‘सती प्रथा’ का विरोध था, जिसके परिणामस्वरूप 1829 में अंग्रेजों ने कानून बनाकर सती प्रथा पर रोक लगा दी। उन्होंने स्त्री शिक्षा और विधवा विवाह का भी प्रबल समर्थन किया।
- आर्य समाज (स्वामी दयानंद सरस्वती):
- स्वामी दयानंद ने 1875 में आर्य समाज की स्थापना की और “वेदों की ओर लौटो” का नारा दिया।
- प्रमुख कार्य: उन्होंने जन्म पर आधारित जाति व्यवस्था और छुआछूत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने ‘शुद्धि आंदोलन’ चलाया, जिसके तहत जो हिंदू जबरन ईसाई या मुसलमान बना दिए गए थे, उन्हें वापस हिंदू धर्म में शामिल किया गया।
- समाज पर प्रभाव: इन आंदोलनों ने भारतीयों के भीतर सोया हुआ आत्मविश्वास जगाया। समाज से कई कुप्रथाएं समाप्त हुईं और महिलाओं की स्थिति में सुधार आया। इन सुधार आंदोलनों ने ही आगे चलकर भारत के राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया।
9. राजस्थान में 1857 की क्रांति के प्रमुख केंद्रों (विशेषकर आउवा और कोटा) की भूमिका का सविस्तार वर्णन करते हुए यहाँ क्रांति की असफलता के कारण बताइए।
- प्रस्तावना: राजस्थान में 1857 की क्रांति केवल सैनिक छावनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई स्थानों पर आम जनता और जागीरदारों ने भी अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठा लिए थे।
- आउवा (मारवाड़) का विद्रोह:
- आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह चंपावत ने अंग्रेजों और जोधपुर के महाराजा की संयुक्त सेना के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका।
- उन्होंने बिठौड़ा और चेलावास के युद्धों में अंग्रेजी सेना को बुरी तरह पराजित किया। चेलावास के युद्ध में जोधपुर के अंग्रेज अधिकारी (पॉलिटिकल एजेंट) मेक मोसन का सिर काटकर आउवा के किले के दरवाजे पर लटका दिया गया था।
- कोटा का जन-विद्रोह:
- कोटा में विद्रोह सैनिकों ने नहीं, बल्कि आम जनता और राज्य की सेना ने जयदयाल और मेहराब खान के नेतृत्व में किया था।
- क्रांतिकारियों ने कोटा के महाराव को महल में कैद कर लिया और अंग्रेज अधिकारी मेजर बर्टन की हत्या करके उसका सिर पूरे शहर में घुमाया। कोटा पर 6 महीने तक जनता का शासन रहा।
- असफलता के कारण: * राजस्थान के अधिकांश बड़े राजाओं (जैसे जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और मेवाड़ के शासकों) ने क्रांति में अपनी ही जनता का साथ न देकर तन, मन और धन से अंग्रेजों का साथ दिया।
- क्रांतिकारियों के पास धन, आधुनिक हथियारों और एक कुशल केंद्रीय नेतृत्व की भारी कमी थी।
10. यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल ‘राजस्थान के पहाड़ी किलों’ (Hill Forts of Rajasthan) और भारत की प्राकृतिक धरोहरों का ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व स्पष्ट कीजिए।
- प्रस्तावना: राजस्थान की शान यहाँ के प्राचीन किले हैं। वर्ष 2013 में यूनेस्को ने राजस्थान के छह प्रमुख पहाड़ी किलों को ‘विश्व सांस्कृतिक धरोहर’ की सूची में शामिल किया था, जो राजपूताना की शौर्य गाथाओं के जीवंत प्रतीक हैं।
- राजस्थान के पहाड़ी किले (सांस्कृतिक धरोहर):
- चित्तौड़गढ़ दुर्ग: यह राजस्थान का सबसे बड़ा किला है, जो राजपूत महिलाओं के ऐतिहासिक ‘जौहर’ और वीरों के ‘शाके’ (बलिदान) के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।
- कुंभलगढ़ दुर्ग (राजसमंद): इसकी 36 किलोमीटर लंबी और चौड़ी सुरक्षा दीवार दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार मानी जाती है। यह मेवाड़ के राजाओं की संकटकालीन राजधानी था।
- इनके अलावा रणथंभौर (सवाई माधोपुर), आमेर (जयपुर), गागरोन (झालावाड़ – जल दुर्ग) और जैसलमेर का किला (सोनार किला) भी इस सूची में शामिल हैं। इन किलों की जल संरक्षण प्रणाली और वास्तुकला अद्वितीय है।
- भारत की प्राकृतिक धरोहरें:
- यूनेस्को केवल इमारतों को ही नहीं, बल्कि दुर्लभ जंगलों और वन्यजीवों को भी ‘प्राकृतिक धरोहर’ मानता है।
- केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर, राजस्थान): यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण पक्षी विहारों में से एक है, जहाँ सर्दियों में साइबेरियन क्रेन सहित हजारों विदेशी पक्षी आते हैं।
- काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (असम): यह एक सींग वाले गैंडे (राइनो) के संरक्षण के लिए विश्व प्रसिद्ध प्राकृतिक धरोहर है।
- इन धरोहरों का संरक्षण पर्यावरण और मानव सभ्यता दोनों के जीवित रहने के लिए अत्यंत आवश्यक है।