MDSU B.A. 5th Semester Economic and Resource Geography Important Questions & Answers

MDSU B.A. 3rd Year Semester 5 Economic and Resource Geography (आर्थिक और संसाधन भूगोल) important questions and answers in Hindi. Read 50-word short notes and 400-word study headings to score full marks in your university exams.

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MDSU B.A. 5th Semester Geography Important Questions & Answers (आर्थिक और संसाधन)

MDSU Ajmer BA 3rd Year (Semester-5) आर्थिक और संसाधन भूगोल के महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर यहाँ उपलब्ध हैं। ये सभी प्रश्न परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों के आधार पर तैयार किए गए हैं। छात्र इन प्रश्नों को पढ़कर अपनी परीक्षा की तैयारी को और बेहतर बना सकते हैं।

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भाग-अ: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Part-A: Short Answers)

निर्देश: प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 50 शब्दों में दें। प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का है।

1. आर्थिक भूगोल की परिभाषा दीजिए।

आर्थिक भूगोल मानव की उन आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन है, जो धन के उत्पादन, विनिमय और उपभोग से संबंधित हैं। यह विज्ञान बताता है कि पृथ्वी के विभिन्न भागों में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके मनुष्य अपनी आजीविका कैसे कमाता है।

2. प्राथमिक और द्वितीयक आर्थिक क्रियाओं में क्या अंतर है?

प्रकृति से सीधे प्राप्त होने वाले संसाधनों का उपयोग प्राथमिक क्रियाएं कहलाती हैं (उदाहरण: कृषि, मछली पकड़ना)। वहीं, जब प्राथमिक उत्पादों का रूप बदलकर उन्हें अधिक मूल्यवान बनाया जाता है, तो उसे द्वितीयक क्रियाएं कहते हैं (उदाहरण: कपास से सूती कपड़ा बनाना)।

3. व्हिट्लसी के अनुसार विश्व को कितने कृषि प्रदेशों में बांटा गया है?

प्रसिद्ध भूगोलवेत्ता डी. व्हिट्लसी ने जलवायु, मिट्टी और कृषि के तरीकों के आधार पर संपूर्ण विश्व को 13 प्रमुख कृषि प्रदेशों में विभाजित किया है। इनमें चलवासी पशुचारण, व्यापारिक अन्न कृषि और भूमध्यसागरीय कृषि प्रमुख हैं।

4. गेहूं की खेती के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाएं क्या हैं?

गेहूं एक शीतोष्ण कटिबंधीय फसल है। इसे बोते समय 10°C तापमान और पकते समय 20°C तापमान की आवश्यकता होती है। इसके लिए 50 से 75 सेंटीमीटर सामान्य वर्षा और हल्की दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है।

5. विश्व व्यापार संगठन के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?

यह एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो देशों के बीच स्वतंत्र और निष्पक्ष व्यापार के नियम बनाती है। इसका मुख्य उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं को दूर करना, विवादों का शांतिपूर्ण समाधान करना और विश्व अर्थव्यवस्था का संतुलित विकास करना है।

6. वैश्वीकरण का विकासशील देशों पर क्या प्रभाव पड़ा है?

वैश्वीकरण के कारण विकासशील देशों में विदेशी निवेश बढ़ा है और नई तकनीकें आई हैं। लेकिन इसके कारण स्थानीय और छोटे उद्योगों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा है, जिससे बेरोजगारी की समस्या भी उत्पन्न हुई है।

7. संसाधन की परिभाषा क्या है?

प्रकृति में पाई जाने वाली वह हर वस्तु जो मानव की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता रखती है, संसाधन कहलाती है। जिम्मरमैन के अनुसार, “संसाधन होते नहीं हैं, बल्कि वे मानवीय उपयोग से बनते हैं।” (उदाहरण: कोयला तब तक पत्थर था जब तक मानव ने उसे जलाना नहीं सीखा)।

8. सतत पोषणीय विकास का क्या अर्थ है?

विकास की वह प्रक्रिया जिसमें पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा किया जाता है, तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखा जाता है, उसे सतत पोषणीय विकास कहते हैं।

9. प्रमुख समुद्री संसाधन कौन-से हैं?

महासागर संसाधनों के विशाल भंडार हैं। इनमें जैविक संसाधन (मछलियां, मूंगा, समुद्री वनस्पतियां) और खनिज संसाधन (पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, नमक और बहुमूल्य मोती) प्रमुख रूप से पाए जाते हैं।

10. विश्व में तांबा और एल्युमिनियम उत्पादक प्रमुख देश कौन-से हैं?

तांबा उत्पादन में चिली (दक्षिण अमेरिका) विश्व में प्रथम स्थान पर है, इसके बाद पेरू और चीन का स्थान आता है। एल्युमिनियम का मुख्य अयस्क बॉक्साइट है, जिसके उत्पादन में ऑस्ट्रेलिया और चीन अग्रणी हैं।

भाग-ब: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Part-B: Descriptive Questions – Study Notes)

निर्देश: इन प्रश्नों के उत्तर 400 शब्दों में दें। प्रत्येक प्रश्न 10 अंक का है। परीक्षा में पूरे अंक प्राप्त करने के लिए उत्तर में निम्नलिखित शीर्षकों का प्रयोग करें:

1. आर्थिक भूगोल के अर्थ और विषय-क्षेत्र का वर्णन करते हुए आर्थिक क्रियाओं को प्रभावित करने वाले भौगोलिक कारकों की विवेचना कीजिए।

  • प्रस्तावना: आर्थिक भूगोल मानव भूगोल की वह प्रमुख शाखा है जो विश्व के विभिन्न भागों में पाई जाने वाली आर्थिक विषमताओं और संसाधनों के वितरण का अध्ययन करती है।
  • आर्थिक भूगोल का विषय-क्षेत्र: इसके अंतर्गत प्राकृतिक संसाधनों (मिट्टी, जल, वन, खनिज) का मूल्यांकन, मानव की विभिन्न आर्थिक क्रियाओं (कृषि, उद्योग, व्यापार) का अध्ययन, और परिवहन व संचार के साधनों का विश्लेषण किया जाता है।
  • आर्थिक क्रियाओं को प्रभावित करने वाले कारक:
    • भौतिक कारक: जलवायु, धरातल की बनावट और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति मानव की आर्थिक गतिविधियों को सबसे अधिक प्रभावित करती है। (उदाहरण: मैदानी और उपजाऊ भागों में कृषि होती है, जबकि पठारी भागों में खनन कार्य)।
    • आर्थिक कारक: पूंजी की उपलब्धता, उन्नत तकनीक, सस्ते मजदूर और विशाल बाजार किसी भी उद्योग या व्यापार की स्थापना के लिए आवश्यक हैं।
    • राजनीतिक और सामाजिक कारक: सरकारी नीतियां, कर व्यवस्था और समाज की परंपराएं भी आर्थिक विकास को दिशा देती हैं।

2. व्हिट्लसी द्वारा प्रस्तुत विश्व के कृषि प्रदेशों का वर्गीकरण कीजिए तथा चावल और कपास के विश्व वितरण का वर्णन कीजिए।

  • व्हिट्लसी का वर्गीकरण: उन्होंने कृषि प्रणालियों को 13 भागों में बांटा, जिनमें प्रमुख हैं: चलवासी पशुचारण (मरुस्थलों में), वाणिज्यिक दुग्ध उत्पादन (यूरोप में), और निर्वाह कृषि (एशिया में)।
  • चावल का उत्पादन एवं वितरण: भौगोलिक दशाएं: यह उष्ण कटिबंधीय मानसूनी फसल है। इसके लिए 20°C से 27°C तापमान और 100 से 200 सेंटीमीटर भारी वर्षा की आवश्यकता होती है। खेतों में पानी भरा रहना चाहिए।
    • विश्व वितरण: विश्व का 90% चावल एशिया में पैदा होता है। चीन विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक है। इसके बाद भारत, बांग्लादेश और इंडोनेशिया का स्थान आता है।
  • कपास का उत्पादन एवं वितरण:
    • भौगोलिक दशाएं: इसे ‘सफेद सोना’ कहा जाता है। इसके लिए 200 पाला-रहित दिन, तेज धूप और नमी सोखने वाली काली मिट्टी सर्वोत्तम होती है।
    • विश्व वितरण: चीन, भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका कपास के सबसे बड़े उत्पादक देश हैं।

3. विश्व में कोयला और पेट्रोलियम संसाधनों के वितरण एवं उत्पादन का विस्तार से विश्लेषण कीजिए।

  • कोयला: इसे ‘उद्योगों की जननी’ कहा जाता है। गुणवत्ता के आधार पर यह चार प्रकार का होता है- एंथ्रेसाइट, बिटुमिनस, लिग्नाइट और पीट।
    • विश्व वितरण: विश्व का अधिकांश कोयला उत्तरी गोलार्ध में पाया जाता है। चीन कोयले का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। संयुक्त राज्य अमेरिका के अप्लेशियन पर्वत क्षेत्र और भारत के छोटानागपुर पठार में भी कोयले के विशाल भंडार हैं।
  • पेट्रोलियम (खनिज तेल): परिवहन और उद्योगों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत है। इसे ‘तरल सोना’ भी कहा जाता है।
    • विश्व वितरण: मध्य पूर्व के देश (सऊदी अरब, ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात) पेट्रोलियम उत्पादन और निर्यात में विश्व में सबसे आगे हैं। इसके अलावा रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका भी बड़े तेल उत्पादक राष्ट्र हैं।

4. उद्योगों के स्थानीयकरण से आप क्या समझते हैं? विश्व में लौह-इस्पात और सूती वस्त्र उद्योग के वितरण को समझाइए।

  • स्थानीयकरण का अर्थ: किसी उद्योग का उस स्थान पर स्थापित होना जहाँ उसे कच्चा माल, मजदूर और परिवहन की सबसे सस्ती और अच्छी सुविधा मिले, उद्योगों का स्थानीयकरण कहलाता है।
  • लौह-इस्पात उद्योग: यह एक आधारभूत और भारी उद्योग है। इसके कारखाने हमेशा कच्चे माल (लौह अयस्क और कोयला) की खदानों के पास लगाए जाते हैं क्योंकि इनका वजन बहुत भारी होता है।
    • विश्व वितरण: चीन विश्व का सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक है। इसके अलावा जापान, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका (पिट्सबर्ग क्षेत्र) इसके प्रमुख उत्पादक हैं।
  • सूती वस्त्र उद्योग: यह कृषि पर आधारित उद्योग है। इसके लिए नम जलवायु और भारी मात्रा में स्वच्छ जल की आवश्यकता होती है।
    • विश्व वितरण: चीन, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस इसके अग्रणी उत्पादक हैं। भारत में यह सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला उद्योग है।

5. संसाधनों के वर्गीकरण को स्पष्ट करते हुए वन और मृदा संसाधनों के दोहन एवं संरक्षण के उपाय बताइए।

  • संसाधनों का वर्गीकरण:
    • नवीकरणीय संसाधन: जिन्हें प्रकृति द्वारा फिर से बनाया जा सकता है (जैसे- सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, वन)।
    • अनवीकरणीय संसाधन: जिनका एक बार उपयोग होने के बाद वे हमेशा के लिए समाप्त हो जाते हैं (जैसे- कोयला, पेट्रोलियम)।
  • वन संसाधनों का संरक्षण: वनों की अंधाधुंध कटाई से पर्यावरण असंतुलन हो रहा है। इसके संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करना, वनों की आग पर नियंत्रण पाना और लकड़ी के अन्य विकल्पों की खोज करना आवश्यक है। (उदाहरण: चिपको आंदोलन)।
  • मृदा (मिट्टी) का संरक्षण: मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ परत का पानी या हवा द्वारा बह जाना मृदा अपरदन कहलाता है। इसे रोकने के लिए पहाड़ों पर सीढ़ीदार खेत बनाना, खेतों की मेड़बंदी करना और एक ही खेत में बदल-बदल कर फसलें (फसल चक्र) बोना आवश्यक है।

6. मानव की प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक आर्थिक क्रियाओं को उदाहरण सहित समझाइए तथा चाय और गन्ने के विश्व वितरण का वर्णन कीजिए।

  • आर्थिक क्रियाओं के प्रकार:
    • प्राथमिक क्रियाएं: जब मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सीधे प्रकृति पर निर्भर रहता है। इसमें कृषि करना, पशुपालन, मछली पकड़ना, जंगलों से लकड़ी काटना और खनन कार्य शामिल हैं।
    • द्वितीयक क्रियाएं: प्रकृति से प्राप्त कच्चे माल का रूप बदलकर उसे अधिक मूल्यवान और उपयोगी बनाना द्वितीयक क्रिया कहलाती है। इसमें सभी प्रकार के विनिर्माण उद्योग (जैसे गन्ने से चीनी बनाना, कपास से कपड़ा बनाना) शामिल हैं।
    • तृतीयक क्रियाएं: ये सेवाएं प्रदान करने वाली क्रियाएं हैं जो प्राथमिक और द्वितीयक क्रियाओं को गति प्रदान करती हैं। इसमें परिवहन, व्यापार, संचार, बैंकिंग और शिक्षा जैसी सेवाएं आती हैं।
  • गन्ना और चाय का वितरण:
    • गन्ना: यह एक उष्ण कटिबंधीय नकदी फसल है। इसके लिए अधिक तापमान और भारी वर्षा चाहिए। ब्राज़ील विश्व में गन्ने का सबसे बड़ा उत्पादक है। इसके बाद भारत और चीन का स्थान आता है।
    • चाय: यह एक बागानी फसल है जो पहाड़ी ढलानों पर उगाई जाती है ताकि जड़ों में पानी न रुके। चीन विश्व का सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश है। भारत (असम, दार्जिलिंग) और केन्या भी इसके प्रमुख उत्पादक हैं।

7. विश्व में लौह-अयस्क, तांबा और एल्युमिनियम (बॉक्साइट) के उत्पादन एवं भौगोलिक वितरण की विस्तृत विवेचना कीजिए।

  • लौह-अयस्क: यह आधुनिक औद्योगिक विकास का आधार है। प्रकृति में यह शुद्ध रूप में नहीं मिलता। उत्तम कोटि के लौह-अयस्क में हेमेटाइट और मैग्नेटाइट प्रमुख हैं।
    • विश्व वितरण: ऑस्ट्रेलिया लौह-अयस्क के उत्पादन और निर्यात में विश्व में प्रथम स्थान पर है। इसके बाद चीन, ब्राज़ील और भारत (ओडिशा, झारखंड) का स्थान आता है।
  • तांबा: यह बिजली का बहुत अच्छा सुचालक है, इसलिए इसका सबसे अधिक उपयोग विद्युत उद्योग (तार और मोटर बनाने) में होता है।
    • विश्व वितरण: दक्षिण अमेरिका का चिली देश तांबा उत्पादन में विश्व में सबसे आगे है। यहाँ की चुकाईकामाता खान बहुत प्रसिद्ध है। इसके बाद पेरू और चीन प्रमुख उत्पादक हैं।
  • एल्युमिनियम (बॉक्साइट): बॉक्साइट वह कच्ची धातु है जिससे एल्युमिनियम निकाला जाता है। यह धातु बहुत हल्की और जंग-रोधी होती है, इसलिए इसका उपयोग हवाई जहाज और बर्तन बनाने में होता है।
    • विश्व वितरण: ऑस्ट्रेलिया बॉक्साइट का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। चीन और गिनी (अफ्रीका) भी इसके विशाल भंडार वाले क्षेत्र हैं।

8. वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं? विश्व व्यापार संगठन के कार्यों का उल्लेख करते हुए विकासशील देशों पर इसके प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।

  • वैश्वीकरण का अर्थ: किसी देश की अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ना वैश्वीकरण कहलाता है। इसमें वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और तकनीक का देशों के बीच बिना किसी रुकावट के आदान-प्रदान होता है।
  • विश्व व्यापार संगठन (डब्लू.टी.ओ.): यह एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो देशों के बीच व्यापार के नियम बनाती है। इसका काम सदस्य देशों के बीच व्यापारिक विवादों को सुलझाना और आयात-निर्यात पर लगने वाले भारी करों (टैक्स) को कम करवाना है।
  • विकासशील देशों पर प्रभाव:
    • सकारात्मक प्रभाव: विकासशील देशों में विदेशी निवेश आया है, जिससे नए उद्योग लगे हैं और रोजगार के अवसर बढ़े हैं। लोगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की अच्छी गुणवत्ता वाली वस्तुएं सस्ती दरों पर मिलने लगी हैं।
    • नकारात्मक प्रभाव: बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आने से विकासशील देशों के छोटे और कुटीर उद्योग बर्बाद हो गए हैं क्योंकि वे इन बड़ी कंपनियों की सस्ती वस्तुओं से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाए। इससे आर्थिक असमानता भी बढ़ी है।

9. समुद्री संसाधनों से आपका क्या तात्पर्य है? इसके अंतर्गत पाए जाने वाले जैविक और खनिज संसाधनों का विस्तार से वर्णन कीजिए।

  • समुद्री संसाधन: महासागर केवल जल के भंडार नहीं हैं, बल्कि ये मानव के लिए भोजन, ऊर्जा और खनिजों के विशाल खजाने हैं। इन्हें ही समुद्री संसाधन कहा जाता है।
  • जैविक संसाधन: इसके अंतर्गत समुद्र में पाए जाने वाले जीव-जंतु और वनस्पतियां आती हैं।
    • मत्स्य पालन (मछलियां): समुद्र से प्राप्त होने वाला यह सबसे बड़ा खाद्य संसाधन है। मछलियां वहां अधिक पाई जाती हैं जहाँ गर्म और ठंडी जलधाराएं मिलती हैं क्योंकि वहां मछलियों का भोजन ‘प्लवक’ बहुतायत में पैदा होता है (जैसे जापान का तट और न्यूफाउंडलैंड)।
    • अन्य जीव और वनस्पति: मूंगा (कोरल), मोती, और आयोडीन युक्त समुद्री घास इसके अन्य प्रमुख जैविक संसाधन हैं।
  • खनिज संसाधन: महासागरों की तली और किनारों पर भारी मात्रा में खनिज छिपे हैं।
    • ​समुद्री जल से भारी मात्रा में नमक प्राप्त किया जाता है।
    • ​समुद्र के उथले किनारों (अपतटीय क्षेत्रों) से पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस निकाली जाती है (जैसे भारत का बॉम्बे हाई क्षेत्र)।

10. सतत पोषणीय विकास की संकल्पना को स्पष्ट कीजिए तथा विश्व के प्रमुख संसाधन प्रदेशों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

  • सतत पोषणीय विकास: यह विकास की वह आधुनिक और संतुलित अवधारणा है जिसका मानना है कि प्राकृतिक संसाधनों (जल, जंगल, जमीन, खनिज) का उपयोग इस प्रकार किया जाए कि हमारी वर्तमान आवश्यकताएं भी पूरी हो जाएं और भविष्य में आने वाली पीढ़ियों के लिए भी ये संसाधन बचे रहें। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को विनाश से बचाना है।
  • संसाधन प्रदेश: पृथ्वी का वह विशाल भौगोलिक क्षेत्र जहाँ मिट्टी, वनस्पति, खनिज और जल जैसे प्राकृतिक संसाधनों में समानता पाई जाती है, उसे संसाधन प्रदेश कहते हैं।
  • विश्व के प्रमुख संसाधन प्रदेश:
    • पश्चिमी यूरोप का औद्योगिक प्रदेश: यहाँ कोयला और लोहे के विशाल भंडार हैं, जिसके कारण यह विश्व का सबसे विकसित औद्योगिक संसाधन प्रदेश बन गया है।
    • उत्तरी अमेरिका का संसाधन प्रदेश: यहाँ अप्लेशियन पर्वत में कोयला और महान झीलों के पास लोहे के विशाल भंडार मौजूद हैं।
    • मध्य-पूर्व का मरुस्थलीय प्रदेश: भले ही यहाँ कृषि और जल संसाधनों की कमी है, लेकिन यह पूरा प्रदेश पेट्रोलियम (खनिज तेल) संसाधनों का सबसे बड़ा भंडार है, जिसने यहाँ की अर्थव्यवस्था को बहुत मजबूत बना दिया है।