MDSU B.A. 3rd Semester History Important Questions & Answers

MDSU B.A. 2nd Year Semester 3 History (मध्यकालीन भारत का इतिहास एवं संग्रहालय विज्ञान) important questions and answers in Hindi. Read 50-word short notes and 400-word study headings to score full marks in your university exams.

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MDSU B.A. 3rd Semester History Important Questions & Answers (मध्यकालीन भारत का इतिहास एवं संग्रहालय विज्ञान)

MDSU Ajmer BA 2nd Year (Semester-3) History के महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर यहाँ उपलब्ध हैं। ये सभी प्रश्न परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों के आधार पर तैयार किए गए हैं। छात्र इन प्रश्नों को पढ़कर अपनी परीक्षा की तैयारी को और बेहतर बना सकते हैं।

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भाग-अ: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Part-A: Short Answers)

निर्देश: प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 50 शब्दों में दें। प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का है।

1. इल्तुतमिश को दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक क्यों कहा जाता है?

कुतुबुद्दीन ऐबक ने केवल दिल्ली सल्तनत की नींव रखी थी, लेकिन इल्तुतमिश ने इसे एक स्वतंत्र और मजबूत राज्य बनाया। उसने राजधानी को लाहौर से दिल्ली स्थानांतरित किया, शुद्ध अरबी सिक्के चलाए और ‘चालीसा दल’ (तुर्कान-ए-चहलगानी) का गठन करके प्रशासन को मजबूत किया।

2. अलाउद्दीन खिलजी की ‘बाजार नियंत्रण नीति’ का मुख्य उद्देश्य क्या था?

अलाउद्दीन खिलजी की बाजार नियंत्रण नीति का मुख्य उद्देश्य अपनी विशाल सेना को कम वेतन में भी संतुष्ट रखना था। इसके लिए उसने रोजमर्रा की सभी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें तय कर दीं और कठोर दंड के द्वारा मुनाफाखोरी को रोका।

3. फिरोजशाह तुगलक द्वारा किए गए किन्हीं दो जन-कल्याणकारी (सार्वजनिक) कार्यों का उल्लेख कीजिए।

फिरोजशाह तुगलक ने जनता की भलाई के लिए कई काम किए, जिनमें दो प्रमुख हैं: 1. कृषि की सिंचाई के लिए पांच बड़ी नहरों का निर्माण करवाना, और 2. गरीबों के मुफ्त इलाज के लिए ‘दारुल-शफ़ा’ (खैराती अस्पताल) की स्थापना करना।

4. भक्ति आंदोलन के किन्हीं दो प्रमुख संतों के नाम लिखिए और उनका मुख्य संदेश क्या था?

भक्ति आंदोलन के दो प्रमुख संत कबीरदास और मीराबाई थे। उनका मुख्य संदेश ईश्वर की प्राप्ति के लिए दिखावटी कर्मकांडों और जाति-पांति के भेदभाव को त्यागकर सच्चे मन से ईश्वर से प्रेम करना था।

5. शेरशाह सूरी की भू-राजस्व व्यवस्था (लगान प्रणाली) की एक मुख्य विशेषता बताइए।

शेरशाह सूरी ने भूमि की सही पैमाइश (नाप) करवाई और पैदावार के आधार पर लगान तय किया। उसने किसानों को ‘पट्टा’ (जिसमें भूमि का विवरण होता था) दिया और उनसे ‘कबूलियत’ (सहमति पत्र) लिखवाया, जिससे किसानों का शोषण कम हुआ।

6. मुगल काल में ‘मनसबदारी प्रथा’ क्या थी?

अकबर द्वारा शुरू की गई मनसबदारी प्रथा मुगल प्रशासन की रीढ़ थी। ‘मनसब’ का अर्थ है पद या दर्जा। इस व्यवस्था के अंतर्गत हर सैन्य और नागरिक अधिकारी को एक पद (मनसब) दिया जाता था, जिसके अनुसार उसका वेतन और उसके द्वारा रखे जाने वाले घोड़ों की संख्या तय होती थी।

7. मराठा साम्राज्य में ‘अष्टप्रधान’ क्या था?

छत्रपति शिवाजी के प्रशासन में राजा को सलाह देने और राज्य का काम संभालने के लिए आठ मंत्रियों की एक परिषद (समिति) होती थी, जिसे ‘अष्टप्रधान’ कहा जाता था। इसमें पेशवा (प्रधानमंत्री) का पद सबसे महत्वपूर्ण होता था।

8. ‘संग्रहालय’ (म्यूजियम) शब्द से आप क्या समझते हैं?

संग्रहालय (Museum) वह संस्थान है जहाँ इतिहास, कला, विज्ञान और संस्कृति से जुड़ी प्राचीन और दुर्लभ वस्तुओं को इकट्ठा करके, उन्हें सुरक्षित रखा जाता है और आम जनता के ज्ञान तथा शोध के लिए प्रदर्शित किया जाता है।

9. पारंपरिक और नवीन संग्रहालय विज्ञान (Conventional and New Museology) में मूल अंतर क्या है?

पारंपरिक संग्रहालय विज्ञान केवल पुरानी वस्तुओं को इकट्ठा करने और उन्हें कांच की अलमारियों में सजाने तक सीमित था। लेकिन नवीन संग्रहालय विज्ञान वस्तुओं से ज्यादा ‘समाज और जनता’ से जुड़ने, शिक्षा देने और स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर देता है।

10. यूनेस्को (UNESCO) का संस्कृति के क्षेत्र में क्या मुख्य कार्य है?

यूनेस्को संयुक्त राष्ट्र का एक निकाय है जिसका मुख्य कार्य दुनिया भर की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासतों की पहचान करना, उन्हें विश्व धरोहर घोषित करना और उनके संरक्षण (बचाव) के लिए आर्थिक तथा तकनीकी मदद प्रदान करना है।

भाग-ब: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Part-B: Descriptive Questions – Study Notes)

निर्देश: इन प्रश्नों के उत्तर 400 शब्दों में दें। प्रत्येक प्रश्न 10 अंक का है। परीक्षा में पूरे अंक प्राप्त करने के लिए उत्तर में निम्नलिखित शीर्षकों का प्रयोग करें:

1. दिल्ली सल्तनत के सुदृढ़ीकरण में बलबन के ‘राजत्व सिद्धांत’ (Theory of Kingship) और उसकी उपलब्धियों का सविस्तार मूल्यांकन कीजिए।

  • प्रस्तावना: इल्तुतमिश की मृत्यु के बाद दिल्ली सल्तनत में भारी अव्यवस्था फैल गई थी। गयासुद्दीन बलबन ने सुल्तान बनकर कठोर नीतियों से सल्तनत को बचाया और सुल्तान के पद की गरिमा को फिर से स्थापित किया।
  • बलबन का राजत्व सिद्धांत:
    • ईश्वर का प्रतिनिधि: बलबन का मानना था कि सुल्तान धरती पर ईश्वर की छाया (जिल्ले-इलाही) है और उसे शासन करने का अधिकार सीधे ईश्वर से मिला है। इसलिए जनता या अमीर (सरदार) सुल्तान के काम की आलोचना नहीं कर सकते।
    • कठोर दरबार के नियम: उसने दरबार में ‘सिजदा’ (घुटनों पर बैठकर सिर झुकाना) और ‘पाबोस’ (सुल्तान के पैर चूमना) जैसी ईरानी प्रथाएं शुरू कीं ताकि लोग राजा से डरें।
    • रक्त और लौह की नीति: बलबन ने विद्रोहियों और लुटेरों का नाश करने के लिए अत्यंत क्रूर नीति अपनाई जिसे ‘रक्त और लौह’ की नीति कहा जाता है।
  • प्रमुख उपलब्धियाँ:
    • ​उसने इल्तुतमिश द्वारा बनाए गए शक्तिशाली ‘चालीसा दल’ का पूरी तरह सफाया कर दिया क्योंकि वे सुल्तान की ताकत के लिए खतरा बन गए थे।
    • ​उसने मंगोलों के आक्रमण से राज्य को बचाने के लिए सीमा पर मजबूत किले बनवाए और एक अलग सैन्य विभाग (दीवान-ए-अर्ज) की स्थापना की।

2. अलाउद्दीन खिलजी के प्रशासनिक एवं आर्थिक सुधारों, विशेषकर उसकी ‘बाजार नियंत्रण प्रणाली’ का विस्तार से वर्णन कीजिए।

  • प्रस्तावना: अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली सल्तनत का पहला सुल्तान था जिसने न केवल साम्राज्य का भारी विस्तार किया, बल्कि शासन और अर्थव्यवस्था में अत्यंत क्रांतिकारी सुधार भी किए।
  • प्रशासनिक और सैन्य सुधार:
    • ​उसने एक विशाल और स्थायी सेना रखी और सैनिकों को नकद वेतन देना शुरू किया।
    • ​सेना में भ्रष्टाचार रोकने के लिए ‘घोड़े दागने’ (घोड़ों पर निशान लगाना) और सैनिकों का ‘हुलिया’ (पहचान पत्र) लिखने की प्रथा शुरू की।
  • बाजार नियंत्रण प्रणाली (सबसे बड़ी उपलब्धि):
    • ​अलाउद्दीन चाहता था कि सैनिक कम वेतन में अपना गुजारा कर सकें, इसलिए उसने अनाज, कपड़े, घोड़ों और दासों सहित हर चीज की कीमत तय कर दी।
    • ​उसने दिल्ली में अलग-अलग चीजों के लिए चार विशेष बाजार बनाए (जैसे अनाज मंडी, कपड़े का बाजार जिसे सराय-अदल कहा जाता था)।
    • ​इन बाजारों पर कड़ी नजर रखने के लिए ‘शहना-ए-मंडी’ और ‘दीवान-ए-रियासत’ नामक कठोर अधिकारी नियुक्त किए। यदि कोई व्यापारी कम तौलता था, तो उसके शरीर से उतना ही मांस काट लिया जाता था।
  • निष्कर्ष: अलाउद्दीन के ये आर्थिक सुधार इतने सफल रहे कि उसके पूरे जीवनकाल में कभी वस्तुओं की कीमतें नहीं बढ़ीं।

3. शेरशाह सूरी और अकबर के प्रशासनिक सुधारों तथा उनकी ‘भू-राजस्व व्यवस्था’ का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत कीजिए।

  • प्रस्तावना: मुगल साम्राज्य की प्रशासनिक सफलता का बहुत बड़ा श्रेय शेरशाह सूरी को जाता है, क्योंकि अकबर ने शेरशाह द्वारा बनाई गई नींव पर ही अपने साम्राज्य का निर्माण किया था।
  • शेरशाह सूरी की भू-राजस्व व्यवस्था:
    • ​शेरशाह ने सारी भूमि की रस्सियों से नाप करवाई।
    • ​उसने जमीन को उसकी पैदावार के अनुसार तीन भागों (अच्छी, मध्यम और खराब) में बांटा और औसत पैदावार का एक-तिहाई हिस्सा लगान (कर) के रूप में तय किया।
    • ​उसने किसानों को ‘पट्टा’ (अधिकार पत्र) दिया जिससे उन्हें पता रहे कि उन्हें कितना कर देना है।
  • अकबर के भू-राजस्व सुधार (दहसाला प्रणाली):
    • ​अकबर के वित्त मंत्री टोडरमल ने शेरशाह की व्यवस्था को और सुधारा।
    • ​उसने ‘दहसाला’ (दस वर्षीय) प्रणाली लागू की। इसमें पिछले दस वर्षों की पैदावार और कीमतों का औसत निकालकर उसी आधार पर अगले वर्षों के लिए लगान तय कर दिया गया, जिससे किसानों को हर साल की परेशानी से मुक्ति मिल गई।
  • प्रशासनिक तुलना: शेरशाह ने पूरे साम्राज्य को ‘सरकारों’ (जिलों) और ‘परगनों’ (तहसीलों) में बांटा था। अकबर ने भी इसी व्यवस्था को अपनाते हुए साम्राज्य को ‘सूबों’, ‘सरकारों’ और ‘परगनों’ में बांटा।

4. मुगल वास्तुकला (Architecture) और चित्रकला (Paintings) के विकास और उनकी प्रमुख विशेषताओं का सविस्तार वर्णन कीजिए।

  • प्रस्तावना: कला और वास्तुकला की दृष्टि से मुगल काल भारतीय इतिहास का अत्यंत शानदार युग था। इस दौरान ईरानी (फारसी) और भारतीय शैलियों के मेल से एक नई कला का जन्म हुआ।
  • मुगल वास्तुकला (विशेषकर शाहजहां का काल):
    • ​मुगल वास्तुकला की प्रमुख विशेषताएँ विशाल गुंबद, ऊंची मीनारें, मेहराबदार दरवाजे और लाल बलुआ पत्थर तथा सफेद संगमरमर का भारी उपयोग है।
    • ​अकबर ने लाल पत्थर से आगरा का किला और फतेहपुर सीकरी का निर्माण करवाया।
    • ​शाहजहां के काल को वास्तुकला का ‘स्वर्ण युग’ कहा जाता है। उसने सफेद संगमरमर से विश्व प्रसिद्ध ताजमहल, दिल्ली का लाल किला और जामा मस्जिद का निर्माण करवाया। इमारतों को कीमती पत्थरों (पित्रा-ड्यूरा शैली) से सजाना इसकी एक बड़ी विशेषता थी।
  • मुगल चित्रकला (विशेषकर जहांगीर का काल):
    • ​मुगल चित्रकला दरबारी और शाही जीवन पर आधारित थी।
    • ​जहांगीर के काल में चित्रकला अपने चरम शिखर पर थी। इस समय प्राकृतिक दृश्यों, पशु-पक्षियों (जैसे मंसूर द्वारा बनाया गया बाज का चित्र) और बारीक विवरण (यथार्थवाद) पर बहुत ध्यान दिया गया।
    • ​चित्रों में चटक रंगों का प्रयोग और किनारों पर सुंदर बेल-बूटे (बॉर्डर) बनाना इसकी मुख्य विशेषताएँ थीं।

5. मराठा साम्राज्य के उदय में छत्रपति शिवाजी के योगदान और उनकी राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था (अष्टप्रधान) का मूल्यांकन कीजिए।

  • प्रस्तावना: सत्रहवीं शताब्दी में मुगल साम्राज्य की विलासिता और औरंगजेब की क्रूर नीतियों के खिलाफ दक्कन (दक्षिण भारत) में शिवाजी के नेतृत्व में एक शक्तिशाली मराठा साम्राज्य का उदय हुआ।
  • साम्राज्य विस्तार और गुरिल्ला युद्ध:
    • ​शिवाजी ने बीजापुर और मुगलों के खिलाफ ‘छापामार’ (गुरिल्ला) युद्ध नीति का शानदार प्रयोग किया। पहाड़ी क्षेत्रों में छिपकर दुश्मन पर अचानक हमला करके वे तुरंत जंगलों में गायब हो जाते थे।
    • ​उन्होंने पुरंदर और रायगढ़ जैसे अभेद्य पहाड़ी किलों का निर्माण और उन पर अधिकार किया।
  • प्रशासनिक व्यवस्था (अष्टप्रधान):
    • ​शिवाजी का प्रशासन अत्यंत कुशल था। राज्य का काम चलाने के लिए आठ मंत्रियों का समूह था, जिसे ‘अष्टप्रधान’ कहते थे।
    • ​इसमें ‘पेशवा’ (प्रधानमंत्री) का पद सबसे बड़ा था। ‘अमात्य’ वित्त मंत्री होता था और ‘सुमंत’ विदेश मंत्री का काम देखता था।
  • राजस्व व्यवस्था (चौथ और सरदेशमुखी):
    • ​शिवाजी ने किसानों की भलाई के लिए जमीन की सही नाप करवाई।
    • ​उन्होंने पड़ोसी राज्यों (जो उनके सीधे नियंत्रण में नहीं थे) से सुरक्षा के बदले उनकी कुल आय का एक-चौथाई हिस्सा (चौथ) और 10 प्रतिशत अतिरिक्त कर (सरदेशमुखी) वसूलने की अनूठी प्रथा शुरू की।

6. ‘संग्रहालय विज्ञान’ (Museology) का अर्थ स्पष्ट करते हुए संग्रहालय के विभिन्न प्रकारों और समाज में उसके महत्व (कार्यों) का विस्तृत विश्लेषण कीजिए।

  • प्रस्तावना: संग्रहालय विज्ञान (Museology) वह विज्ञान है जो संग्रहालयों के इतिहास, उनके उद्देश्य, संगठन और वस्तुओं को सुरक्षित रखने के वैज्ञानिक तरीकों का अध्ययन करता है।
  • संग्रहालयों के प्रकार (वर्गीकरण):
    • ​संग्रह के आधार पर संग्रहालय कई प्रकार के होते हैं:
    • पुरातत्व संग्रहालय: जहाँ पुरानी सभ्यताओं, सिक्कों और मूर्तियों को रखा जाता है (जैसे राष्ट्रीय संग्रहालय, दिल्ली)।
    • कला संग्रहालय: जहाँ चित्रकला, मूर्तिकला और हस्तशिल्प का प्रदर्शन होता है।
    • विज्ञान और तकनीकी संग्रहालय: जहाँ विज्ञान के नियमों, मशीनों और आविष्कारों के मॉडल रखे जाते हैं।
    • प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय: जहाँ प्राचीन जीवों (जैसे डायनासोर के कंकाल), पौधों और खनिजों को सुरक्षित रखा जाता है।
  • समाज में संग्रहालयों की भूमिका (महत्व):
    • धरोहर का संरक्षण: इनका सबसे मुख्य काम हमारी मूल्यवान सांस्कृतिक और ऐतिहासिक वस्तुओं को नष्ट होने से बचाना और उन्हें भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है।
    • शिक्षा और ज्ञान का प्रसार: ये केवल वस्तुएं रखने की जगह नहीं हैं, बल्कि छात्रों और आम जनता के लिए शिक्षा का बहुत बड़ा केंद्र हैं। लोग यहाँ आकर अपने इतिहास को साक्षात देखते हैं।
    • शोध (रिसर्च) का केंद्र: ये इतिहासकारों और वैज्ञानिकों को शोध के लिए मूल स्रोत प्रदान करते हैं।

7. दिल्ली सल्तनत के सुल्तान फिरोजशाह तुगलक के प्रमुख ‘सार्वजनिक निर्माण कार्यों’ और जनकल्याणकारी सुधारों का विस्तृत वर्णन कीजिए।

  • प्रस्तावना: मुहम्मद बिन तुगलक के बाद उसका चचेरा भाई फिरोजशाह तुगलक दिल्ली की गद्दी पर बैठा। वह एक महान योद्धा तो नहीं था, लेकिन शांति स्थापित करने और अपनी प्रजा की भलाई के लिए किए गए अनगिनत निर्माण कार्यों के लिए उसे सल्तनत काल का ‘कल्याणकारी सुल्तान’ कहा जाता है।
  • प्रमुख सार्वजनिक निर्माण कार्य:
    • नहरों का निर्माण: कृषि और सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए उसने पांच बड़ी नहरें बनवाईं। इनमें यमुना नदी से हिसार तक और सतलज नदी से घग्गर तक की नहरें सबसे प्रमुख थीं, जिससे बंजर जमीन भी उपजाऊ बन गई।
    • नगरों और बागों की स्थापना: उसने अपने शासनकाल में हिसार, फिरोजाबाद, जौनपुर और फतेहाबाद जैसे कई नए नगर बसाए। इसके अलावा फलों की पैदावार बढ़ाने के लिए दिल्ली के आसपास 1200 नए बाग लगवाए।
  • जनकल्याणकारी सुधार:
    • दीवान-ए-खैरात (दान विभाग): इस नए विभाग का काम गरीब और अनाथ मुस्लिम लड़कियों के विवाह के लिए आर्थिक सहायता देना और विधवाओं की मदद करना था।
    • दारुल-शफ़ा (खैराती अस्पताल): उसने दिल्ली में एक बहुत बड़ा अस्पताल बनवाया जहाँ गरीब मरीजों का मुफ्त इलाज होता था और उन्हें भोजन भी दिया जाता था।
    • दीवान-ए-बंदगान (दास विभाग): फिरोजशाह को दासों का बहुत शौक था। उसने दासों की देखभाल और उनके रोजगार के लिए एक अलग विभाग बनवाया।

8. मध्यकालीन भारत में ‘विजयनगर साम्राज्य’ के राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास का सविस्तार वर्णन करते हुए कृष्णदेव राय की उपलब्धियों पर प्रकाश डालिए।

  • प्रस्तावना: चौदहवीं शताब्दी में जब उत्तर भारत में मुहम्मद बिन तुगलक का शासन था, तब दक्षिण भारत में हरिहर और बुक्का नामक दो भाइयों ने एक स्वतंत्र हिंदू राज्य ‘विजयनगर साम्राज्य’ की स्थापना की।
  • कृष्णदेव राय की राजनीतिक उपलब्धियाँ:
    • ​कृष्णदेव राय (तुलुव वंश) विजयनगर साम्राज्य के सबसे महान और प्रतापी शासक थे।
    • ​उन्होंने अपनी बेहतरीन सैन्य शक्ति से विद्रोही सामंतों को कुचला और बीजापुर के सुल्तान तथा ओडिशा के गजपति शासकों को बुरी तरह पराजित करके अपने साम्राज्य का भारी विस्तार किया।
  • सांस्कृतिक और साहित्यिक उपलब्धियाँ:
    • ​कृष्णदेव राय स्वयं एक महान विद्वान थे। उन्होंने तेलुगु भाषा में ‘अमुक्तमाल्यदा’ नामक एक महान ग्रंथ की रचना की। उनके दरबार में तेलुगु साहित्य के आठ महान कवि रहते थे, जिन्हें ‘अष्टदिग्गज’ कहा जाता था।
  • वास्तुकला का विकास:
    • ​विजयनगर साम्राज्य अपनी शानदार मंदिर वास्तुकला के लिए विश्व प्रसिद्ध है। कृष्णदेव राय ने हम्पी (विजयनगर की राजधानी) में ‘हजारा राम मंदिर’ और ‘विट्ठलस्वामी मंदिर’ का निर्माण करवाया, जिनके खंभों से संगीत की ध्वनि निकलती है।

9. मध्यकालीन भारतीय समाज (सल्तनत और मुगल काल) की सामाजिक संरचना और आर्थिक जीवन (व्यापार और वाणिज्य) का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।

  • प्रस्तावना: मध्यकालीन भारत एक ऐसा युग था जहाँ हिंदू और मुस्लिम संस्कृतियों का मिलन हो रहा था। इस दौरान समाज और अर्थव्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव आए।
  • सामाजिक संरचना:
    • ​समाज मुख्य रूप से अमीर (सुल्तान, मनसबदार, उलेमा) और आम जनता (किसान, मजदूर, कारीगर) में बंटा हुआ था।
    • स्त्रियों की स्थिति: इस काल में स्त्रियों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। समाज में पर्दा प्रथा, सती प्रथा, बाल विवाह और बहुविवाह जैसी कुप्रथाएं जोरों पर थीं। राजघरानों में हरम की व्यवस्था थी।
    • ​इसके बावजूद रज़िया सुल्तान और नूरजहां जैसी शक्तिशाली महिलाओं ने सत्ता संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • आर्थिक जीवन (व्यापार और वाणिज्य):
    • ​कृषि अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार थी, लेकिन व्यापार और उद्योगों (विशेषकर सूती कपड़े के कारखानों) का भी भारी विकास हुआ।
    • ​साम्राज्य के भीतर सड़कों (जैसे शेरशाह द्वारा बनाई गई ग्रांड ट्रंक रोड) के निर्माण से आंतरिक व्यापार बढ़ा।
    • ​भारत के सूती वस्त्र, मसाले और नील दुनिया भर में प्रसिद्ध थे। इनका व्यापार मध्य एशिया, अरब और यूरोपीय देशों के साथ होता था, जिसके बदले में भारत को भारी मात्रा में सोना और चांदी मिलता था।

10. भारत और विश्व के संदर्भ में ‘संग्रहालयों के इतिहास और विकास’ का विस्तार से वर्णन कीजिए।

  • प्रस्तावना: संग्रहालय विज्ञान के पाठ्यक्रम के अनुसार, पुरानी और मूल्यवान वस्तुओं को सहेजने की प्रवृत्ति मनुष्य में प्राचीन काल से ही रही है, लेकिन आधुनिक संग्रहालयों का विकास कुछ शताब्दियों पहले ही हुआ।
  • विश्व के संदर्भ में संग्रहालयों का विकास:
    • ​शुरुआत में यूनान (ग्रीस) में विद्या और कला की देवियों के मंदिरों को ‘म्यूजियम’ कहा जाता था, जहाँ विद्वान विचार-विमर्श करते थे।
    • ​सोलहवीं सदी में यूरोप में पुनर्जागरण के बाद राजाओं और अमीरों ने कलाकृतियां जमा करनी शुरू कीं। अठारहवीं सदी में ब्रिटेन का ‘ब्रिटिश संग्रहालय’ और फ्रांस का ‘ल浮र संग्रहालय’ (लौवरे) आम जनता के लिए खोले गए, जो आधुनिक संग्रहालयों की शुरुआत थी।
  • भारत में संग्रहालयों का विकास:
    • ​भारत में संग्रहालयों की शुरुआत अंग्रेजों के आने के बाद हुई।
    • ​सबसे पहला और सबसे पुराना संग्रहालय वर्ष 1814 में बंगाल की एशियाटिक सोसाइटी द्वारा कोलकाता में स्थापित किया गया (भारतीय संग्रहालय, कोलकाता)।
    • ​इसके बाद आजादी तक देश के विभिन्न हिस्सों में (जैसे मद्रास, मुंबई और दिल्ली का राष्ट्रीय संग्रहालय) कई बड़े पुरातात्विक संग्रहालय स्थापित किए गए।

11. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में ‘संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन’ (यूनेस्को) की भूमिका और ‘अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय परिषद’ (आईकॉम) की आचार संहिता का सविस्तार वर्णन कीजिए।

  • प्रस्तावना: दुनिया भर में फैली हुई पुरानी सभ्यताओं की निशानियों, स्मारकों और संग्रहालयों को नष्ट होने से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण संस्थाएं काम कर रही हैं।
  • सांस्कृतिक संरक्षण में ‘यूनेस्को’ की भूमिका:
    • ​यह संस्था दुनिया भर की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक इमारतों, जंगलों और प्राकृतिक स्थानों को ‘विश्व धरोहर’ (वर्ल्ड हेरिटेज) घोषित करती है।
    • ​जब किसी देश की धरोहर को युद्ध, भूकंप या प्रदूषण से खतरा होता है, तो यह संस्था उसे बचाने के लिए भारी आर्थिक मदद और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक (तकनीकी सहायता) भेजती है।
  • अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय परिषद की आचार संहिता:
    • ​यह दुनिया भर के संग्रहालयों से जुड़े अधिकारियों का सबसे बड़ा संगठन है।
    • आचार संहिता (नियम): इस परिषद ने संग्रहालयों के लिए कुछ कड़े नियम बनाए हैं। इसके अनुसार कोई भी संग्रहालय चोरी की गई या गैरकानूनी तरीके से खोदी गई किसी भी मूर्ति या कलाकृति को न तो खरीदेगा और न ही प्रदर्शित करेगा।
    • ​संग्रहालय का उद्देश्य पैसा कमाना नहीं, बल्कि जनता की सेवा करना, शिक्षा देना और समाज के हर वर्ग के लिए अपने दरवाजे खुले रखना होना चाहिए।