MDSU B.A. 5th Semester Political Science Important Questions & Answers

MDSU B.A. 3rd Year Semester 5 Political Science (पाश्चात्य राजनीतिक विचारक एवं जिला परिषद) important questions and answers in Hindi. Read 50-word short notes and 400-word study headings to score full marks in your university exams.

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MDSU B.A. 5th Semester Political Science Important Questions & Answers (पाश्चात्य राजनीतिक विचारक एवं जिला परिषद)

MDSU Ajmer BA 3rd Year (Semester-5) Political Science के महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर यहाँ उपलब्ध हैं। ये सभी प्रश्न परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों के आधार पर तैयार किए गए हैं। छात्र इन प्रश्नों को पढ़कर अपनी परीक्षा की तैयारी को और बेहतर बना सकते हैं।

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भाग-अ: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Part-A: Short Answers)

निर्देश: प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 50 शब्दों में दें। प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का है।

1. प्लेटो के ‘दार्शनिक राजा’ (Philosopher King) से क्या तात्पर्य है?

प्लेटो का मानना था कि जब तक दार्शनिक राजा नहीं बनेंगे या राजाओं में दर्शन (ज्ञान) नहीं होगा, तब तक राज्य बुराइयों से मुक्त नहीं हो सकता। दार्शनिक राजा वह है जिसे सच्चा ज्ञान हो, जो निस्वार्थ हो और जिसका संपत्ति या परिवार से कोई मोह न हो।

2. अरस्तु के अनुसार ‘राज्य’ क्या है?

अरस्तु के अनुसार राज्य कोई कृत्रिम संस्था नहीं है, बल्कि यह एक प्राकृतिक संस्था है जिसका विकास परिवार और ग्राम से हुआ है। उसका प्रसिद्ध कथन है, “मनुष्य स्वभाव से एक राजनीतिक प्राणी है, और जो राज्य के बाहर रहता है, वह या तो देवता है या पशु।”

3. संत ऑगस्टीन के ‘दो नगरों के सिद्धांत’ (Theory of Two Cities) का क्या अर्थ है?

संत ऑगस्टीन ने संसार को दो नगरों में बांटा है: 1. ईश्वरीय नगर (जहाँ लोग ईश्वर से प्रेम करते हैं और शांति व भलाई के मार्ग पर चलते हैं) और 2. सांसारिक नगर (जहाँ लोग केवल स्वयं से और धन-दौलत से प्रेम करते हैं)।

4. मैकियावेली के अनुसार राजा को धर्म और नैतिकता का प्रयोग कैसे करना चाहिए?

मैकियावेली ने राजनीति को धर्म और नैतिकता से बिल्कुल अलग कर दिया। उसका मानना था कि राजा के लिए राज्य की सुरक्षा ही सबसे बड़ा धर्म है। यदि राज्य को बचाने के लिए राजा को झूठ, धोखा या अनैतिक साधनों का भी प्रयोग करना पड़े, तो वह सही है।

5. थॉमस हॉब्स के अनुसार ‘प्राकृतिक अवस्था’ में मानव का स्वभाव कैसा था?

हॉब्स के अनुसार राज्य बनने से पहले (प्राकृतिक अवस्था में) मनुष्य अत्यंत स्वार्थी, लालची, क्रूर और हिंसक था। हर व्यक्ति दूसरे व्यक्ति का दुश्मन था और चारों तरफ “सबकी सबके खिलाफ लड़ाई” का माहौल था।

6. जॉन लॉक को ‘उदारवाद का जनक’ क्यों कहा जाता है?

लॉक का मानना था कि मनुष्य के पास जन्म से ही तीन प्राकृतिक अधिकार होते हैं: जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति का अधिकार। राज्य का निर्माण इन अधिकारों की रक्षा के लिए हुआ है। व्यक्ति की स्वतंत्रता का कड़ा समर्थन करने के कारण ही उसे उदारवाद का जनक कहा जाता है।

7. रूसो की ‘सामान्य इच्छा’ (General Will) का सिद्धांत क्या है?

रूसो के अनुसार, जब समाज के सभी लोग अपने व्यक्तिगत स्वार्थों को छोड़कर पूरे समाज की भलाई के लिए एक साथ मिलकर कोई निर्णय लेते हैं, तो उसे ‘सामान्य इच्छा’ कहते हैं। कानून इसी सामान्य इच्छा की अभिव्यक्ति है और राजा को इसी के अनुसार शासन करना चाहिए।

8. कार्ल मार्क्स के ‘अतिरिक्त मूल्य’ (Surplus Value) के सिद्धांत का क्या अर्थ है?

मार्क्स के अनुसार, किसी वस्तु को बनाने में मजदूर जितनी मेहनत करता है, उसकी असली कीमत वही होती है। लेकिन पूंजीपति (कारखाना मालिक) उस वस्तु को बाजार में ज्यादा दाम पर बेचता है। इस तरह जो मुनाफा (फायदा) पूंजीपति अपनी जेब में रखता है, वह मजदूर की मेहनत की चोरी है, जिसे ‘अतिरिक्त मूल्य’ कहते हैं।

9. जिला परिषद का गठन कैसे होता है?

जिला परिषद पंचायती राज व्यवस्था का सबसे ऊपरी (शीर्ष) स्तर है। इसके सदस्य जिले के मतदाताओं द्वारा सीधे चुने जाते हैं। इसके अलावा जिले के सभी पंचायत समितियों के प्रधान, और उस जिले से चुने गए विधायक (MLA) तथा सांसद (MP) भी इसके सदस्य होते हैं।

10. जिला प्रमुख के कोई दो मुख्य कार्य बताइए।

जिला प्रमुख जिला परिषद का अध्यक्ष होता है। इसके दो मुख्य कार्य हैं: 1. जिला परिषद की बैठकों की अध्यक्षता करना और उन्हें शांतिपूर्ण ढंग से चलाना, 2. जिले की सभी पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों की निगरानी (देखरेख) करना।

भाग-ब: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Part-B: Descriptive Questions – Study Notes)

निर्देश: इन प्रश्नों के उत्तर 400 शब्दों में दें। प्रत्येक प्रश्न 10 अंक का है। परीक्षा में पूरे अंक प्राप्त करने के लिए उत्तर में निम्नलिखित शीर्षकों का प्रयोग करें:

1. प्लेटो के न्याय सिद्धांत (Theory of Justice) की विस्तृत विवेचना कीजिए।

  • प्रस्तावना: प्लेटो का न्याय आधुनिक न्यायालयों वाला न्याय (जज और वकील वाला) नहीं है। उनका न्याय एक नैतिक सिद्धांत है जो मनुष्य की आत्मा से जुड़ा है। उनके प्रसिद्ध ग्रंथ ‘रिपब्लिक’ का मुख्य विषय ही न्याय की खोज करना है।
  • आत्मा के तीन गुण: प्लेटो के अनुसार मनुष्य की आत्मा में तीन गुण होते हैं- 1. विवेक (बुद्धि), 2. साहस (शौर्य), और 3. तृष्णा (इच्छा या भूख)।
  • समाज के तीन वर्ग: इन्हीं तीन गुणों के आधार पर राज्य में तीन वर्ग बनते हैं:
    • शासक वर्ग: जिनमें बुद्धि अधिक है, वे शासन करेंगे।
    • सैनिक वर्ग: जिनमें साहस अधिक है, वे देश की रक्षा करेंगे।
    • उत्पादक वर्ग: जिनमें तृष्णा (काम करने की इच्छा) अधिक है, वे खेती और व्यापार करेंगे।
  • न्याय का अर्थ: प्लेटो के अनुसार, “समाज के इन तीनों वर्गों द्वारा अपने-अपने हिस्से का काम पूरी ईमानदारी से करना और एक-दूसरे के काम में कोई दखल (हस्तक्षेप) न देना ही सच्चा न्याय है।”

2. अरस्तु के ‘संविधानों के वर्गीकरण’ (Classification of Governments) को सविस्तार समझाइए।

  • प्रस्तावना: अरस्तु ने अपने समय के 158 देशों के संविधानों का गहराई से अध्ययन किया और उसके बाद सरकारों (संविधानों) का वैज्ञानिक वर्गीकरण प्रस्तुत किया।
  • वर्गीकरण का आधार: उन्होंने इसे दो आधारों पर बांटा है- 1. शासन करने वालों की संख्या (एक, कुछ, या अनेक) और 2. शासन का उद्देश्य (जनता की भलाई या अपना स्वार्थ)।
  • शुद्ध रूप (जब राजा जनता की भलाई सोचे):
    • राजतंत्र (Monarchy): एक अच्छे व्यक्ति का शासन।
    • कुलीनतंत्र (Aristocracy): कुछ समझदार और अच्छे लोगों का शासन।
    • संयतादर्श या पॉलिटी (Polity): बहुत से लोगों का शासन (मध्यम वर्ग का)। अरस्तु इसे सबसे अच्छा शासन मानता है।
  • विकृत रूप (जब राजा स्वार्थी हो जाए):
    • निरंकुश तंत्र (Tyranny): राजतंत्र जब क्रूर हो जाए।
    • धनिक तंत्र (Oligarchy): जब अमीर लोग गरीबों का शोषण करें।
    • भीड़तंत्र या लोकतंत्र (Democracy): अरस्तु लोकतंत्र को अच्छा नहीं मानता था; उसके अनुसार यह अनपढ़ और मूर्ख भीड़ का शासन है।

3. “मैकियावेली अपने युग का शिशु था।” इस कथन को स्पष्ट करते हुए उसके आधुनिक राजनीतिक विचारों का वर्णन कीजिए।

  • प्रस्तावना: मैकियावेली को ‘आधुनिक राजनीति विज्ञान का जनक’ कहा जाता है। वह इटली का रहने वाला था। उस समय इटली छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटा था और वहाँ भारी भ्रष्टाचार था। इसी माहौल ने उसके विचारों को जन्म दिया।
  • राज्य को सर्वोपरि मानना: मैकियावेली ने सबसे पहले ‘राष्ट्र-राज्य’ (Nation-State) का विचार दिया। उसने कहा कि राज्य से बढ़कर कोई संस्था नहीं है और व्यक्ति को राज्य के लिए सब कुछ न्यौछावर कर देना चाहिए।
  • धर्म और राजनीति का अलगाव: मध्यकाल में राजनीति पर चर्च (धर्म) का भारी नियंत्रण था। मैकियावेली पहला विचारक था जिसने कहा कि राजनीति और धर्म दोनों बिल्कुल अलग हैं। एक राजा को धर्म का उपयोग केवल जनता को नियंत्रण में रखने के लिए एक ‘हथियार’ के रूप में करना चाहिए।
  • शक्ति की राजनीति: उसने अपनी पुस्तक ‘द प्रिंस’ में बताया कि राजनीति केवल शक्ति हासिल करने और उसे बनाए रखने का खेल है। एक राजा में शेर जैसी बहादुरी और लोमड़ी जैसी चालाकी होनी चाहिए।

4. हॉब्स, लॉक और रूसो के ‘सामाजिक समझौते’ (Social Contract) के सिद्धांतों की तुलनात्मक समीक्षा कीजिए।

  • प्रस्तावना: 17वीं और 18वीं शताब्दी में इन तीनों विचारकों ने यह साबित किया कि राज्य को ईश्वर ने नहीं बनाया, बल्कि मनुष्यों ने आपस में एक ‘समझौता’ करके इसे बनाया है।
  • थॉमस हॉब्स (पूर्ण तानाशाही का समर्थक): हॉब्स का मानना था कि मनुष्य बहुत हिंसक था। इसलिए लोगों ने अपने सभी अधिकार एक राजा (लेवियाथन) को सौंप दिए। यह राजा सर्वोच्च है और कोई भी जनता इसके खिलाफ विद्रोह नहीं कर सकती।
  • जॉन लॉक (सीमित सरकार का समर्थक): लॉक के अनुसार मनुष्य स्वभाव से अच्छा और शांतिप्रिय था। उसने केवल अपनी संपत्ति और अधिकारों की बेहतर रक्षा के लिए समझौता किया। यदि सरकार (राजा) जनता के अधिकारों की रक्षा नहीं कर पाती है, तो जनता को उसे हटाने का पूरा अधिकार है।
  • जे.जे. रूसो (लोकतंत्र का समर्थक): रूसो के अनुसार मनुष्य पहले बहुत सुखी था, लेकिन ‘निजी संपत्ति’ (तेरा-मेरा) के लालच ने सब कुछ बिगाड़ दिया। उसने कहा कि सारी शक्ति किसी एक राजा के पास नहीं, बल्कि पूरी जनता की ‘सामान्य इच्छा’ (General Will) के पास होनी चाहिए।

5. जेरेमी बेंथम के ‘उपयोगितावाद’ (Utilitarianism) सिद्धांत का वर्णन करते हुए उसमें जे.एस. मिल द्वारा किए गए सुधारों को बताइए।

  • प्रस्तावना: उपयोगितावाद 19वीं सदी का एक प्रमुख सिद्धांत है। जेरेमी बेंथम इसके जनक माने जाते हैं।
  • बेंथम का उपयोगितावाद: बेंथम के अनुसार, प्रकृति ने मनुष्य को दो चीजों का गुलाम बनाया है- ‘सुख’ और ‘दुख’। जो काम हमें सुख देता है, वह उपयोगी और अच्छा है; जो दुख देता है, वह बुरा है।
    • अधिकतम लोगों का अधिकतम सुख: बेंथम ने कहा कि सरकार को ऐसे ही कानून बनाने चाहिए जिनसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुख मिले। उनके अनुसार सुख केवल ‘मात्रा’ (Quantity) में होता है; अर्थात् कविता पढ़ने का सुख और ताश खेलने का सुख बराबर है।
  • जे.एस. मिल द्वारा सुधार: जे.एस. मिल ने बेंथम के सिद्धांत में बड़े बदलाव किए।
    • गुणों का महत्व: मिल ने कहा कि सुख केवल मात्रा में नहीं, बल्कि ‘गुण’ (Quality) में भी अलग-अलग होता है। एक मूर्ख व्यक्ति के जीवन से कहीं अधिक श्रेष्ठ एक असंतुष्ट सुकरात (विद्वान) का जीवन है।​स्वतंत्रता का रक्षक: मिल ने कहा कि समाज की भलाई के नाम पर किसी एक व्यक्ति की स्वतंत्रता को नहीं छीना जा सकता।

6. कार्ल मार्क्स के ‘द्वंद्वात्मक भौतिकवाद’ और ‘वर्ग संघर्ष’ के सिद्धांतों का सविस्तार वर्णन कीजिए।

  • प्रस्तावना: कार्ल मार्क्स समाजवाद (साम्यवाद) के सबसे महान विचारक हैं। उनका उद्देश्य समाज से अमीरी-गरीबी का भेद मिटाकर एक ऐसे समाज की स्थापना करना था जहाँ कोई वर्ग या राज्य न हो।
  • द्वंद्वात्मक भौतिकवाद (Dialectical Materialism): मार्क्स ने यह विचार हीगल से लिया था। इसका अर्थ है कि दुनिया में जो भी बदलाव होते हैं, वे किसी ईश्वर की मर्जी से नहीं, बल्कि ‘पदार्थ’ (आर्थिक परिस्थितियों) के आपस में टकराने (द्वंद्व) से होते हैं।
  • वर्ग संघर्ष (Class Struggle): मार्क्स के अनुसार, इतिहास हमेशा से दो वर्गों के बीच की लड़ाई का इतिहास रहा है। एक वर्ग वह है जिसके पास धन और कारखाने हैं (शोषक/पूंजीपति), और दूसरा वर्ग वह है जिसके पास केवल अपनी मेहनत है (शोषित/मजदूर या सर्वहारा)।
  • क्रांति और परिणाम: मार्क्स ने भविष्यवाणी की कि पूंजीपति लालच में आकर मजदूरों का इतना शोषण करेंगे कि अंत में मजदूर एक हो जाएंगे और खूनी क्रांति करेंगे। इस क्रांति में पूंजीपतियों का नाश होगा और सत्ता मजदूरों के हाथ में आ जाएगी।

7. हीगल के ‘राज्य सिद्धांत’ और द्वंद्वात्मक आदर्शवाद की व्याख्या कीजिए।

  • प्रस्तावना: जी.डब्ल्यू.एफ. हीगल जर्मनी के एक महान दार्शनिक थे। उनका चिंतन अत्यंत जटिल है। वे राज्य को एक साक्षात् देवता मानते थे।
  • द्वंद्वात्मक आदर्शवाद: हीगल का मानना था कि दुनिया का विकास किसी ‘पदार्थ’ से नहीं, बल्कि ‘विचार’ (Idea) या आत्मा से हुआ है। विकास एक सीधी रेखा में नहीं होता, बल्कि टकराव से होता है:
    • ​पहले एक विचार आता है (Thesis – वाद)।
    • ​फिर उसका विरोधी विचार जन्म लेता है (Antithesis – प्रतिवाद)।
    • ​दोनों के टकराव से एक बेहतर और नया विचार बनता है (Synthesis – संवाद)।
  • हीगल का राज्य सिद्धांत: हीगल के अनुसार राज्य ईश्वर का पृथ्वी पर अवतरण (मार्च) है। राज्य से बाहर मनुष्य का कोई अधिकार या स्वतंत्रता नहीं है। राज्य हमेशा सही होता है। उसने युद्ध का समर्थन किया और शांति को कायरों का गुण बताया। यह सिद्धांत बाद में इटली और जर्मनी में तानाशाही (फासीवाद) का कारण बना।

8. जिला परिषद की शक्तियों, कार्यों और उसकी सीमाओं (चुनौतियों) का विस्तृत विश्लेषण कीजिए।

  • प्रस्तावना: पंचायती राज व्यवस्था (73वें संविधान संशोधन) में जिला परिषद ग्रामीण विकास की सबसे बड़ी सीढ़ी है, जो सीधे राज्य सरकार और पंचायत समितियों के बीच काम करती है।
  • जिला परिषद के प्रमुख कार्य और शक्तियां:
    • योजना बनाना: पूरे जिले के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए योजनाएं तैयार करना और राज्य सरकार को भेजना।​पर्यवेक्षण (निगरानी): जिले की सभी पंचायत समितियों के बजट (खर्च) की जांच करना और उनके काम पर नजर रखना।​कृषि और सिंचाई: उन्नत खेती के तरीकों को बढ़ावा देना, सिंचाई की व्यवस्था करना और किसानों की भलाई के लिए योजनाएं लागू करना।​शिक्षा और स्वास्थ्य: ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा (बड़ों को पढ़ाना) और अस्पतालों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं सुधारना।
    • सीमाएं और चुनौतियां (Limitations):
      • धन का अभाव: जिला परिषदों के पास टैक्स लगाने के सीमित अधिकार होते हैं। वे पूरी तरह राज्य सरकार से मिलने वाले फंड पर निर्भर रहती हैं।​प्रशासनिक हस्तक्षेप: जिला कलेक्टर और अन्य बड़े आईएएस अधिकारी चुने हुए प्रतिनिधियों (जिला प्रमुख) पर हावी हो जाते हैं।​राजनीतिक दबाव: मंत्रियों और बड़े नेताओं के भारी हस्तक्षेप के कारण जिला परिषदें स्वतंत्रता से काम नहीं कर पातीं।