MDSU B.A. 5th Semester Sociology Important Questions & Answers

MDSU B.A. 3rd Year Semester 5 Sociology (भारत में बदलती सामाजिक संस्थाएं, जनांकिकी और वैश्वीकरण) important questions and answers in Hindi. Read 50-word short notes and 400-word study headings to score full marks in your university exams.

Follow Now..

MDSU B.A. 5th Semester Sociology Important Questions & Answers (भारत में बदलती सामाजिक संस्थाएं, जनांकिकी और वैश्वीकरण)

MDSU Ajmer BA 3rd Year (Semester-5) Sociology के महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर यहाँ उपलब्ध हैं। ये सभी प्रश्न परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों के आधार पर तैयार किए गए हैं। छात्र इन प्रश्नों को पढ़कर अपनी परीक्षा की तैयारी को और बेहतर बना सकते हैं।

🙏 MDSU B.A. All Semesters Important Questions & Answers
सभी सेमेस्टर देखें →

भाग-अ: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Part-A: Short Answers)

निर्देश: प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 50 शब्दों में दें। प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का है।

1. भारत में संयुक्त परिवार के आकार और संरचना में आ रहे किसी एक बड़े बदलाव का उल्लेख कीजिए।

औद्योगीकरण और रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन के कारण बड़े संयुक्त परिवार अब छोटे ‘नाभिकीय परिवारों’ (Nuclear Families) में टूट रहे हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल (Care giving) की व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

2. विवाह संस्था में ‘सहजीवन’ (Cohabitation) से आप क्या समझते हैं?

सहजीवन या ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ विवाह संस्था में आ रहा एक नया बदलाव है, जहाँ एक स्त्री और पुरुष बिना औपचारिक विवाह किए एक ही छत के नीचे पति-पत्नी की तरह रहते हैं।

3. ‘औपचारिक’ (Formal) और ‘अनौपचारिक’ (Informal) शिक्षा में मुख्य अंतर क्या है?

औपचारिक शिक्षा स्कूलों और कॉलेजों में एक निश्चित पाठ्यक्रम, समय-सारणी और नियमों के तहत दी जाती है। जबकि अनौपचारिक शिक्षा जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है जो व्यक्ति अपने परिवार, समाज और अनुभवों से बिना किसी नियम के सीखता है।

4. कार्यक्षेत्र में ‘स्त्रैणीकरण’ (Feminization of Work) का क्या अर्थ है?

समाज के कुछ विशेष व्यवसायों (जैसे- नर्सिंग, रिसेप्शनिस्ट, प्राइमरी टीचर या सिलाई) को मुख्य रूप से केवल महिलाओं का काम मान लिया जाना और इन क्षेत्रों में महिलाओं की अत्यधिक भागीदारी को ही कार्य का ‘स्त्रैणीकरण’ कहते हैं।

5. शिक्षा के क्षेत्र में ‘डिजिटल डिवाइड’ (Digital Divide) क्या है?

अमीर और गरीब या शहर और गांव के बीच कंप्यूटर, स्मार्टफोन और इंटरनेट की पहुँच में जो भारी अंतर है, उसे डिजिटल डिवाइड कहते हैं। इसके कारण गरीब बच्चे आधुनिक तकनीकी शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।

6. वैश्वीकरण (Globalization) का भारतीय खान-पान और भाषा पर क्या प्रभाव पड़ा है?

वैश्वीकरण के कारण भारतीय युवा अब पारंपरिक भोजन की जगह पिज्जा, बर्गर (फास्ट फूड) पसंद कर रहे हैं। भाषा के क्षेत्र में स्थानीय बोलियों की जगह अंग्रेजी और ‘हिंग्लिश’ (हिंदी+इंग्लिश) का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है।

7. ‘नए सामाजिक आंदोलन’ (New Social Movements) क्या हैं? एक उदाहरण दीजिए।

ये वे आंदोलन हैं जो केवल पैसे या सत्ता के लिए नहीं, बल्कि मानवाधिकारों, पहचान और पर्यावरण को बचाने के लिए चलाए जाते हैं। उदाहरण- पारिस्थितिकी (Ecology) बचाने का आंदोलन या LGBTQ (समलैंगिक) अधिकारों का आंदोलन।

8. ‘जनांकिकी’ (Demography) को परिभाषित कीजिए।

जनांकिकी वह विज्ञान है जो किसी क्षेत्र की जनसंख्या के आकार, संरचना, घनत्व, जन्म दर, मृत्यु दर और प्रवास (Migration) का सांख्यिकीय और गणितीय अध्ययन करता है।

9. जनसांख्यिकीय आंकड़े प्राप्त करने के किन्हीं दो प्रमुख स्रोतों के नाम लिखिए।

जनसंख्या के आंकड़े जुटाने के दो सबसे प्रमुख स्रोत हैं: 1. राष्ट्रीय जनगणना (Population Census) जो हर 10 साल में होती है, और 2. राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (National Sample Survey – NSS)।

10. ‘जनसंख्या शिक्षा’ (Population Education) का मुख्य उद्देश्य क्या है?

जनसंख्या शिक्षा का उद्देश्य युवाओं और नागरिकों को बढ़ती जनसंख्या के खतरों, सीमित संसाधनों और परिवार नियोजन (Family Planning) के महत्व के बारे में जागरूक करना है ताकि वे छोटा परिवार रखने के लिए प्रेरित हों।

भाग-ब: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Part-B: Descriptive Questions – Study Notes)

निर्देश: इन प्रश्नों के उत्तर 400 शब्दों में दें। प्रत्येक प्रश्न 10 अंक का है। परीक्षा में पूरे अंक प्राप्त करने के लिए उत्तर में निम्नलिखित शीर्षकों का प्रयोग करें:

1. भारत में ‘परिवार’ और ‘विवाह’ की संस्थाओं में आ रहे वर्तमान संरचनात्मक और संबंधपरक बदलावों की विस्तृत विवेचना कीजिए।

  • प्रस्तावना: आधुनिकता, औद्योगीकरण और पश्चिमीकरण के प्रभाव से भारतीय समाज की सबसे मजबूत संस्थाओं—परिवार और विवाह—में तेजी से बदलाव आ रहे हैं।
  • परिवार की संरचना में बदलाव:
    • आकार में कमी: पारंपरिक बड़े संयुक्त परिवारों की जगह अब माता-पिता और अविवाहित बच्चों वाले ‘नाभिकीय परिवार’ (Nuclear Family) ले रहे हैं।
    • संबंधों में लोकतंत्रीकरण (Democratization): पहले परिवार में केवल पिता या बुजुर्ग का आदेश चलता था, लेकिन अब पति-पत्नी और माता-पिता व बच्चों के बीच संबंध मित्रवत (लोकतांत्रिक) हो गए हैं। महत्वपूर्ण फैसलों में महिलाओं और बच्चों की राय ली जाती है।
    • देखभाल की समस्या: परिवार टूटने से बुजुर्गों की देखभाल (Old age homes का बढ़ना) और नौकरीपेशा महिलाओं के बच्चों की देखभाल (Creches/Daycare) एक बड़ी चुनौती बन गई है।
  • विवाह के स्वरूप में बदलाव:
    • जीवनसाथी का चुनाव: अब माता-पिता द्वारा तय किए गए विवाहों (Arranged Marriages) के साथ-साथ प्रेम विवाह (Love Marriages) और सहजीवन (Cohabitation) को भी समाज में धीरे-धीरे स्वीकृति मिल रही है।
    • तलाक और पुनर्विवाह: विवाह अब जन्म-जन्मांतर का अटूट बंधन नहीं रहा। वैचारिक मतभेद होने पर तलाक (Divorce) की दरें बढ़ रही हैं और पुनर्विवाह को सामान्य माना जाने लगा है।

2. शिक्षा के एक सामाजिक संस्था के रूप में महत्व को स्पष्ट करते हुए, ‘शिक्षा व रोजगार’ (Education and Employability) तथा ‘डिजिटल डिवाइड’ की वर्तमान चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • प्रस्तावना: शिक्षा व्यक्ति का ‘समाजीकरण’ करने और उसे समाज का एक उपयोगी नागरिक बनाने का सबसे शक्तिशाली साधन है।
  • शिक्षा के प्रकार और महत्व:
    • औपचारिक और अनौपचारिक: स्कूल-कॉलेज की औपचारिक शिक्षा और परिवार की अनौपचारिक शिक्षा दोनों ही व्यक्ति के जीवन के अवसर (Life Chances) तय करती हैं। मैक्स वेबर के अनुसार, अच्छी शिक्षा ही व्यक्ति को समाज में उच्च वर्ग और बेहतर नौकरी दिलाती है।
  • शिक्षा और रोजगार क्षमता (Employability):
    • ​आज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हमारी शिक्षा प्रणाली ‘डिग्री’ तो बांट रही है, लेकिन युवाओं में बाजार की मांग के अनुसार ‘कौशल’ (Skills) विकसित नहीं कर पा रही है। इसी कारण शिक्षित बेरोजगारी बढ़ रही है।
  • तकनीक और डिजिटल डिवाइड की चुनौती:
    • ​कोरोना काल के बाद शिक्षा पूरी तरह तकनीक (Technology) पर निर्भर हो गई है।
    • ​लेकिन ‘डिजिटल डिवाइड’ के कारण शहरों के अमीर छात्र ऑनलाइन क्लास और लैपटॉप का लाभ उठा रहे हैं, जबकि गांवों के गरीब छात्र इंटरनेट और स्मार्टफोन के अभाव में पिछड़ रहे हैं। यह असमानता शिक्षा के मूल उद्देश्य को खत्म कर रही है।

3. भारतीय समाज पर ‘वैश्वीकरण’ (Globalization) के प्रभावों का सविस्तार वर्णन कीजिए, विशेषकर खान-पान, जीवन-शैली और विवाह के परिप्रेक्ष्य में।

  • प्रस्तावना: 1991 के बाद भारत ने जब अपनी अर्थव्यवस्था को दुनिया के लिए खोला, तो उसे वैश्वीकरण कहा गया। इसने केवल व्यापार को ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और समाज को भी पूरी तरह से बदल कर रख दिया।
  • खान-पान और भाषा पर प्रभाव:
    • ​पारंपरिक भोजन (दाल-रोटी) की जगह अब बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ‘फास्ट फूड’ (पिज्जा, बर्गर, नूडल्स) ने ले ली है।
    • ​भाषा में अंग्रेजी का वर्चस्व बढ़ गया है, जिसे ‘सफलता की चाबी’ मान लिया गया है।
  • युवाओं की जीवन-शैली (Life Styles) और विचारों पर प्रभाव:
    • ​विदेशी टीवी चैनलों, इंटरनेट और सोशल मीडिया के कारण युवाओं का ‘विश्व दृष्टिकोण’ (World View) बदल गया है। अब वे ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की जगह व्यक्तिवाद (Individualism) और दिखावे की संस्कृति (Consumerism) में जी रहे हैं।
  • प्रेम और विवाह के परिदृश्य में बदलाव:
    • ​वैश्वीकरण के कारण ‘लव मैरिज’, ‘डेटिंग’, और ऑनलाइन मैट्रिमोनियल साइट्स का चलन बढ़ गया है। वैवाहिक संबंधों में अब जाति और धर्म से ज्यादा आर्थिक स्थिति और करियर को महत्व दिया जाने लगा है।

4. भारत में ‘सामाजिक न्याय’ के लिए चलाए गए आंदोलनों (Social Movements) की विवेचना कीजिए, विशेषकर दलित आंदोलन और नए सामाजिक आंदोलनों के संदर्भ में।

  • प्रस्तावना: भारतीय समाज सदियों से जातिगत और सामाजिक असमानता का शिकार रहा है। इस भेदभाव को मिटाने और समाज के हर वर्ग को समान अधिकार (सामाजिक न्याय) दिलाने के लिए कई बड़े आंदोलन हुए।
  • संविधान की भूमिका: भारत का संविधान सभी को समानता का मौलिक अधिकार देता है और छुआछूत को समाप्त करता है।
  • दलित और पिछड़े वर्गों के आंदोलन:
    • ​डॉ. बी.आर. अंबेडकर के नेतृत्व में दलितों ने अपने राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों के लिए भारी संघर्ष किया। इन आंदोलनों के कारण ही उन्हें शिक्षा, रोजगार और राजनीति में ‘आरक्षण’ मिला, जिससे उनकी स्थिति में बहुत सुधार आया है।
  • नए सामाजिक आंदोलन (New Social Movements):
    • ​आज के आंदोलन केवल रोटी या मजदूरी के लिए नहीं हैं।
    • नागरिक अधिकार (Civil Rights): लोग अब भ्रष्टाचार के खिलाफ (जैसे अन्ना हजारे आंदोलन) और सूचना के अधिकार (RTI) के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं।
    • पर्यावरण (Ecology) और LGBTQ: नर्मदा बचाओ जैसे आंदोलन पर्यावरण की रक्षा के लिए लड़े जा रहे हैं। इसी तरह समलैंगिक समुदाय (LGBTQ) भी समाज में सम्मान और पहचान पाने के लिए नए सामाजिक आंदोलन चला रहा है।

5. ‘सामाजिक जनांकिकी’ (Social Demography) का अर्थ व क्षेत्र स्पष्ट करते हुए भारत में तेजी से बढ़ती जनसंख्या के कारणों और इसके भयंकर परिणामों का सविस्तार विश्लेषण कीजिए।

  • प्रस्तावना: किसी भी देश के विकास के लिए उसकी जनसंख्या का आकार और गुण बहुत मायने रखता है। जनसंख्या के वैज्ञानिक अध्ययन को ही जनांकिकी कहा जाता है।
  • जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारण (Causes):
    • उच्च प्रजनन दर (Fertility): भारत में बाल विवाह, गरीबी, और शिक्षा की कमी के कारण लोग अधिक बच्चे पैदा करते हैं। ‘लड़के की चाह’ में भी जनसंख्या बढ़ती है।
    • मृत्यु दर (Mortality) में भारी कमी: आजादी के बाद चिकित्सा सुविधाओं में भारी सुधार हुआ है। महामारियों पर रोक लगने से मृत्यु दर कम हो गई है, लेकिन जन्म दर उसी रफ्तार से बढ़ती रही, जिससे ‘जनसंख्या विस्फोट’ हो गया।
  • जनसंख्या वृद्धि के परिणाम (Consequences):
    • बेरोजगारी और गरीबी: जितने रोजगार पैदा होते हैं, उससे कहीं ज्यादा युवाओं की भीड़ बाजार में आ जाती है।
    • संसाधनों पर दबाव: रहने के लिए जमीन कम पड़ रही है, जंगल कट रहे हैं, और पीने के पानी का संकट पैदा हो गया है।
  • समाधान: सरकार द्वारा ‘परिवार नियोजन’ (Family Planning) और ‘जनसंख्या शिक्षा’ के माध्यम से लोगों को छोटे परिवार के फायदों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। महिलाओं की शिक्षा पर सबसे अधिक जोर देना चाहिए।

6. ‘कार्य’ (काम) की बदलती प्रकृति पर प्रकाश डालिए। अर्थव्यवस्था के ‘औपचारिक’ और ‘अनौपचारिक’ क्षेत्र में अंतर स्पष्ट करते हुए ‘कार्य के स्त्रैणीकरण’ की विस्तृत विवेचना कीजिए।

  • प्रस्तावना: समाज में आजीविका (रोजी-रोटी) कमाने के तरीकों को कार्य कहा जाता है। आधुनिकीकरण और वैश्वीकरण के कारण भारत में कार्य करने के तरीकों और अर्थव्यवस्था के ढांचे में भारी बदलाव आया है।
  • औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्र में अंतर:
    • औपचारिक (संगठित) क्षेत्र: इसमें वे नौकरियां आती हैं जो सरकार के नियमों के अधीन होती हैं। यहाँ कर्मचारियों को तय वेतन, छुट्टियां, पेंशन और नौकरी की सुरक्षा मिलती है (जैसे- सरकारी नौकरियाँ या बड़ी कंपनियों में काम)।
    • अनौपचारिक (असंगठित) क्षेत्र: इसमें कोई निश्चित नियम या नौकरी की सुरक्षा नहीं होती। दिहाड़ी मजदूर, रेहड़ी-पटरी वाले, और घरों में काम करने वाले लोग इसी में आते हैं। भारत की लगभग नब्बे प्रतिशत (90%) आबादी इसी क्षेत्र में काम करती है और उनका भारी आर्थिक शोषण होता है।
  • कार्य का स्त्रैणीकरण:
    • ​इसका अर्थ है अर्थव्यवस्था के कुछ विशेष कामों में महिलाओं की भागीदारी का बहुत अधिक बढ़ जाना।
    • ​समाज ने यह मान लिया है कि महिलाएं स्वभाव से कोमल होती हैं, इसलिए नर्सिंग, सिलाई, ब्यूटी पार्लर या प्राथमिक स्कूल में पढ़ाने जैसे काम केवल महिलाओं के लिए ही बने हैं।
    • ​हालाँकि महिलाओं का रोजगार बढ़ा है, लेकिन वे आज भी दोहरी जिम्मेदारी (दफ्तर और घर का काम) का बोझ उठा रही हैं और उन्हें पुरुषों के मुकाबले कम वेतन दिया जाता है।

7. ‘सामाजिक जनांकिकी’ में जनसांख्यिकीय आंकड़े प्राप्त करने के प्रमुख स्रोतों (जैसे- राष्ट्रीय जनगणना और प्रतिदर्श सर्वेक्षण) का सविस्तार वर्णन कीजिए।

  • प्रस्तावना: किसी भी देश की सरकार को विकास की योजनाएं बनाने (जैसे कितने स्कूल या अस्पताल चाहिए) के लिए अपनी जनसंख्या की सही जानकारी होना बहुत जरूरी है। यह जानकारी जिन तरीकों से इकट्ठा की जाती है, उन्हें जनांकिकीय स्रोत कहते हैं।
  • जनसांख्यिकीय आंकड़े प्राप्त करने के प्रमुख स्रोत:
    • राष्ट्रीय जनगणना: यह जनसंख्या के आंकड़े जुटाने का सबसे बड़ा और प्रामाणिक स्रोत है। भारत में हर दस साल में एक बार जनगणना होती है। इसके माध्यम से देश की कुल आबादी, साक्षरता दर, स्त्री-पुरुष अनुपात और रोजगार की स्थिति का विस्तृत पता चलता है।
    • राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण: चूँकि जनगणना हर साल नहीं हो सकती, इसलिए सरकार हर साल कुछ खास विषयों (जैसे- गरीबी, बेरोजगारी और स्वास्थ्य) पर छोटे स्तर के सर्वेक्षण करवाती है। इसमें पूरे देश की बजाय कुछ हजार परिवारों को नमूने (निदर्शन) के रूप में चुना जाता है।
    • जन्म-मृत्यु पंजीकरण: भारत में कानून के अनुसार हर बच्चे के जन्म और हर व्यक्ति की मृत्यु का सरकारी दफ्तर (या पंचायत) में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इससे सरकार को हर साल बढ़ने और घटने वाली जनसंख्या का सटीक आंकड़ा मिल जाता है।

8. ‘जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत’ क्या है? इसकी विभिन्न अवस्थाओं का वर्णन करते हुए भारतीय परिप्रेक्ष्य में इसका मूल्यांकन कीजिए।

  • प्रस्तावना: वारेन थॉम्पसन द्वारा दिया गया ‘जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत’ यह बताता है कि जैसे-जैसे कोई देश पिछड़ेपन से विकास की ओर बढ़ता है, वैसे-वैसे उसकी जनसंख्या के बढ़ने की दर में क्या बदलाव आते हैं।
  • सिद्धांत की तीन प्रमुख अवस्थाएं:
    • प्रथम अवस्था (पिछड़ा समाज): इस अवस्था में समाज खेती पर निर्भर होता है और चिकित्सा सुविधाएं नहीं होतीं। इसलिए यहाँ जन्म दर भी बहुत ऊँची होती है और मृत्यु दर भी बहुत ऊँची होती है। परिणामस्वरूप, जनसंख्या बहुत धीमी गति से बढ़ती है (जैसे प्राचीन काल का भारत)।
    • द्वितीय अवस्था (विकासशील समाज): जब देश तरक्की करने लगता है, तो अच्छे अस्पतालों के कारण मृत्यु दर तो तेजी से नीचे गिर जाती है, लेकिन पुरानी सोच के कारण जन्म दर ऊँची ही बनी रहती है। यही वह अवस्था है जिसमें ‘जनसंख्या विस्फोट’ होता है (भारत वर्तमान में इसी अवस्था से गुजर रहा है)।
    • तृतीय अवस्था (विकसित समाज): जब समाज पूरी तरह शिक्षित और औद्योगिक हो जाता है, तो लोग छोटे परिवार का महत्व समझ जाते हैं। यहाँ जन्म दर और मृत्यु दर दोनों बहुत नीचे आ जाती हैं और जनसंख्या स्थिर हो जाती है (जैसे यूरोप के देश)।

9. भारत में ‘लिंग अनुपात’ (स्त्री-पुरुष अनुपात) के लगातार गिरने के प्रमुख कारणों और इसके भयंकर सामाजिक परिणामों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।

  • प्रस्तावना: प्रति एक हजार पुरुषों पर महिलाओं की कुल संख्या को ‘लिंग अनुपात’ कहा जाता है। भारत में (कुछ राज्यों को छोड़कर) महिलाओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले लगातार कम बनी हुई है, जो समाजशास्त्रियों के लिए एक गहरी चिंता का विषय है।
  • लिंग अनुपात गिरने के प्रमुख कारण:
    • पितृसत्तात्मक सोच और पुत्र प्राप्ति की चाह: भारतीय समाज में वंश चलाने और बुढ़ापे का सहारा बनने के लिए बेटे को ही जरूरी माना जाता है, इसलिए लोग बेटियों के जन्म को टालना चाहते हैं।
    • दहेज प्रथा: दहेज की भयंकर मांग के कारण बेटियों को एक ‘आर्थिक बोझ’ मान लिया गया है।
    • कन्या भ्रूण हत्या: नई चिकित्सा तकनीकों (अल्ट्रासाउंड) का दुरुपयोग करके गर्भ में ही लिंग की जांच करा ली जाती है और लड़की होने पर उसे जन्म लेने से पहले ही मार दिया जाता है।
  • सामाजिक परिणाम:
    • ​महिलाओं की संख्या कम होने से समाज का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया है।
    • ​विवाह के लिए लड़कियों की कमी हो गई है, जिसके कारण महिलाओं की खरीद-फरोख्त और उनके खिलाफ हिंसा तथा यौन अपराधों में भारी वृद्धि हुई है।

10. भारतीय समाज में ‘धर्म’ संस्था के बदलते स्वरूप की विवेचना कीजिए। समाजशास्त्र के संदर्भ में ‘धर्मनिरपेक्षता’ और ‘सांप्रदायिकता’ की अवधारणाओं को विस्तार से समझाइए।

  • प्रस्तावना: भारत एक अत्यंत धार्मिक देश है जहाँ जीवन का हर कार्य धर्म से प्रभावित होता है। लेकिन आधुनिक शिक्षा, विज्ञान और पश्चिमी विचारों के कारण अब धार्मिक मान्यताओं और कर्मकांडों में भारी बदलाव आ रहा है।
  • धर्म का बदलता स्वरूप:
    • ​पहले लोग बीमारियों और प्राकृतिक आपदाओं को ‘ईश्वर का प्रकोप’ मानते थे, लेकिन अब वे इसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों को समझते हैं।
    • ​पूजा-पाठ और दिखावे की जगह अब धर्म का उपयोग मन की शांति के लिए ज्यादा किया जा रहा है।
  • धर्मनिरपेक्षता (पंथनिरपेक्षता) की अवधारणा:
    • ​समाजशास्त्र में इसका अर्थ है- राज्य (सरकार) का अपना कोई धर्म नहीं होगा। सरकार की नजर में सभी धर्म एक समान होंगे और किसी भी व्यक्ति के साथ उसके धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। व्यक्ति अपनी मर्जी से कोई भी धर्म मानने के लिए स्वतंत्र है।
  • सांप्रदायिकता की चुनौती:
    • ​जब कोई व्यक्ति या समूह अपने धर्म को सबसे श्रेष्ठ और दूसरे के धर्म को नीचा समझने लगता है, तो उसे सांप्रदायिकता कहते हैं।
    • ​राजनीतिक स्वार्थों के लिए धर्म का गलत इस्तेमाल करके एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ भड़काना ही सांप्रदायिक दंगों का मूल कारण है, जो भारत के राष्ट्र-निर्माण में आज भी सबसे बड़ी बाधा है।