MDSU B.A. 1st Year Semester-2nd Economics (भारतीय अर्थव्यवस्था) important questions and answers in Hindi. Read 50-word short notes and 400-word study headings to score full marks in your university exams.
Follow Now..
MDSU B.A. 2nd Semester Economics Important Questions & Answers (भारतीय अर्थव्यवस्था)
MDSU Ajmer BA 1st Year (Semester-2) Economics के महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर यहाँ उपलब्ध हैं। ये सभी प्रश्न परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों के आधार पर तैयार किए गए हैं। छात्र इन प्रश्नों को पढ़कर अपनी परीक्षा की तैयारी को और बेहतर बना सकते हैं।
भाग-अ: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Part-A: Short Answers)
निर्देश: प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 50 शब्दों में दें। प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का है।
1. स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर भारतीय अर्थव्यवस्था की कोई दो विशेषताएँ बताइए।
स्वतंत्रता के समय भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत पिछड़ी हुई और गतिहीन (Stagnant) थी। पहली विशेषता: कृषि का बहुत अधिक पिछड़ापन और जमींदारी प्रथा का शोषण। दूसरी विशेषता: उद्योगों का पतन और प्रति व्यक्ति आय का बहुत कम होना।
2. अर्थव्यवस्था के तीन मुख्य ‘क्षेत्र’ (Sectors) कौन-से हैं?
अर्थव्यवस्था को मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में बांटा जाता है: 1. प्राथमिक क्षेत्र (कृषि, पशुपालन, खनन), 2. द्वितीयक क्षेत्र (विनिर्माण या उद्योग), और 3. तृतीयक क्षेत्र (सेवा क्षेत्र जैसे बैंकिंग, परिवहन, शिक्षा)।
3. ‘राजकोषीय नीति’ (Fiscal Policy) और ‘मौद्रिक नीति’ (Monetary Policy) में क्या अंतर है?
राजकोषीय नीति सरकार की आय (टैक्स) और व्यय (खर्च) से संबंधित नीति है, जिसे वित्त मंत्रालय बनाता है। मौद्रिक नीति देश में मुद्रा की मात्रा (Money Supply) और ब्याज दरों को नियंत्रित करने की नीति है, जिसे देश का केंद्रीय बैंक (RBI) बनाता है।
4. भारत में ‘नीति आयोग’ (NITI Aayog) का गठन कब हुआ और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
योजना आयोग को समाप्त करके 1 जनवरी 2015 को ‘नीति आयोग’ (राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान) का गठन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य सरकारों की भागीदारी बढ़ाकर ‘सहकारी संघवाद’ को मजबूत करना और सरकार के लिए एक ‘थिंक टैंक’ (Think Tank) के रूप में काम करना है।
5. ‘नई आर्थिक नीति 1991’ (NEP 1991) के तीन मुख्य स्तंभ क्या हैं?
नई आर्थिक नीति 1991 के तीन मुख्य स्तंभ ‘LPG’ हैं:
- उदारीकरण (Liberalization): उद्योगों को सख्त नियमों और लाइसेंस राज से मुक्त करना।
- निजीकरण (Privatization): सरकारी कंपनियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना।
- वैश्वीकरण (Globalization): भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया की अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ना।
6. मनरेगा (MGNREGA) योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण भारत में आजीविका सुरक्षा को मजबूत करना है। यह हर ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी देता है।
7. मेक इन इंडिया (Make in India) कार्यक्रम क्या है?
‘मेक इन इंडिया’ 2014 में शुरू की गई भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है। इसका उद्देश्य विदेशी और घरेलू कंपनियों को भारत में ही अपने उत्पादों का निर्माण (Manufacturing) करने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि देश में भारी मात्रा में रोजगार पैदा हों।
8. MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) से आप क्या समझते हैं?
MSME का अर्थ है सूक्ष्म (Micro), लघु (Small) और मध्यम (Medium) उद्यम। ये वे उद्योग हैं जिनमें बड़ी कंपनियों के मुकाबले कम पूंजी का निवेश होता है, लेकिन ये भारत में कृषि के बाद सबसे ज्यादा रोजगार सृजन और निर्यात में योगदान देते हैं।
9. नई औद्योगिक नीति 1991 (New Industrial Policy 1991) का एक प्रमुख लक्ष्य बताइए।
इस नीति का सबसे बड़ा लक्ष्य ‘लाइसेंस राज’ को खत्म करना था। केवल कुछ बहुत जरूरी और खतरनाक उद्योगों (जैसे शराब, तंबाकू, रक्षा उपकरण) को छोड़कर बाकी सभी उद्योगों के लिए लाइसेंस लेने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई, ताकि उद्योग तेजी से बढ़ सकें।
10. ‘विदेशी व्यापार की दिशा’ (Direction of Foreign Trade) का क्या अर्थ है?
विदेशी व्यापार की दिशा का अर्थ यह जानना है कि कोई देश किन-किन देशों के साथ सबसे ज्यादा आयात (मंगाना) और निर्यात (भेजना) कर रहा है। उदाहरण के लिए, भारत वर्तमान में सबसे ज्यादा निर्यात अमेरिका (USA) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को करता है।
भाग-ब: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Part-B: Descriptive Questions – Study Notes)
निर्देश: इन प्रश्नों के उत्तर 400 शब्दों में दें। प्रत्येक प्रश्न 10 अंक का है। परीक्षा में पूरे अंक प्राप्त करने के लिए उत्तर में निम्नलिखित शीर्षकों का प्रयोग करें:
1. भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक) का जीडीपी (GDP) और रोजगार सृजन में क्या योगदान है? स्वतंत्रता के समय से लेकर अब तक इसमें क्या बदलाव आए हैं?
- प्रस्तावना: किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का ढांचा (Structure) उसके विभिन्न क्षेत्रों के योगदान से तय होता है।
- विभिन्न क्षेत्रों का योगदान:
- प्राथमिक क्षेत्र (कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र): स्वतंत्रता की पूर्व संध्या (1947) पर भारत की GDP में कृषि का योगदान 50% से अधिक था और 70% से ज्यादा आबादी इसी पर निर्भर थी। वर्तमान में कृषि का GDP में योगदान घटकर लगभग 17-18% रह गया है, लेकिन आज भी देश की लगभग 45% आबादी रोजगार के लिए कृषि पर ही निर्भर है।
- द्वितीयक क्षेत्र (उद्योग एवं विनिर्माण): यह क्षेत्र कच्चे माल को उपयोगी वस्तुओं में बदलता है। इसका GDP में योगदान धीरे-धीरे बढ़कर लगभग 25-28% हो गया है। रोजगार सृजन में इसकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कृषि से निकले अतिरिक्त मजदूरों को काम देता है।
- तृतीयक क्षेत्र (सेवा क्षेत्र): यह भारतीय अर्थव्यवस्था का ‘ग्रोथ इंजन’ (Growth Engine) बन चुका है। बैंकिंग, IT, पर्यटन और स्वास्थ्य इसके प्रमुख हिस्से हैं। वर्तमान में भारत की कुल GDP में सेवा क्षेत्र का योगदान 50% से अधिक (सबसे ज्यादा) है, लेकिन यह उस अनुपात में रोजगार नहीं दे पा रहा है (केवल 30-32% रोजगार)।
- निष्कर्ष: भारतीय अर्थव्यवस्था ने एक अजीब विकास यात्रा तय की है। पश्चिमी देशों ने पहले कृषि से उद्योग और फिर सेवा क्षेत्र में छलांग लगाई, लेकिन भारत सीधे कृषि से छलांग लगाकर सेवा क्षेत्र (Service Sector) प्रधान अर्थव्यवस्था बन गया है, जो ‘जॉबलेस ग्रोथ’ (रोजगारविहीन वृद्धि) का एक बड़ा कारण है।
2. भारत में ‘आर्थिक नियोजन’ (Economic Planning) के इतिहास की विवेचना करते हुए ‘नीति आयोग’ (NITI Aayog) की भूमिका, उद्देश्यों और पंचवर्षीय योजनाओं से इसके अंतर को स्पष्ट कीजिए।
- प्रस्तावना: 1947 में आजादी के बाद भारत ने रूस की तरह एक नियोजित अर्थव्यवस्था (Planned Economy) का रास्ता चुना। इसके लिए 1950 में ‘योजना आयोग’ (Planning Commission) की स्थापना की गई थी, जिसने 12 पंचवर्षीय योजनाएं बनाईं।
- योजना आयोग से नीति आयोग तक का सफर: * योजना आयोग ‘टॉप-डाउन’ (Top-Down) अप्रोच पर काम करता था, यानी केंद्र सरकार नीतियां बनाती थी और राज्यों को उसे मानना पड़ता था। समय के साथ यह तरीका पुराना हो गया।
- भारत की बदलती जरूरतों को देखते हुए 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग को भंग करके ‘नीति आयोग’ (National Institution for Transforming India) की स्थापना की गई।
- नीति आयोग के प्रमुख उद्देश्य और भूमिका:
- सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism): नीति आयोग में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होते हैं। यह मानता है कि “मजबूत राज्य ही एक मजबूत राष्ट्र बनाते हैं।”
- बॉटम-अप अप्रोच (Bottom-Up Approach): अब नीतियां गांव और राज्य के स्तर से बनकर केंद्र तक पहुंचती हैं, न कि केंद्र से थोपी जाती हैं।
- थिंक टैंक: यह सरकार को लंबे समय की नीतियां (15 साल का विजन डॉक्यूमेंट) बनाने के लिए बौद्धिक और तकनीकी सलाह देता है।
- नवाचार (Innovation) को बढ़ावा: यह देश में अटल इनोवेशन मिशन जैसे कार्यक्रमों के जरिए नए विचारों को बढ़ावा दे रहा है।
3. भारत की ‘नई आर्थिक नीति 1991’ (New Economic Policy 1991) के प्रमुख उद्देश्यों और विशेषताओं (LPG Reforms) का सविस्तार वर्णन कीजिए।
- प्रस्तावना: 1991 में भारत भयंकर आर्थिक संकट में फंस गया था। विदेशी मुद्रा भंडार केवल दो हफ्तों का आयात करने लायक बचा था। इस संकट से निकलने के लिए तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने ‘नई आर्थिक नीति 1991’ की घोषणा की।
- नई आर्थिक नीति की विशेषताएँ (LPG Reforms):
- 1. उदारीकरण (Liberalization): इसका मतलब था अर्थव्यवस्था को सरकारी नियंत्रण और ‘लाइसेंस राज’ से आजाद करना। 1991 से पहले हर काम के लिए सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी। इस नीति के तहत व्यापार के नियमों को बहुत आसान कर दिया गया, करों (Taxes) को कम किया गया और ब्याज दरों को बाजार के हवाले कर दिया गया।
- 2. निजीकरण (Privatization): इसके तहत घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों (PSUs) के शेयर आम जनता और निजी कंपनियों को बेचे गए (जिसे विनिवेश या Disinvestment कहते हैं)। जिन क्षेत्रों में पहले केवल सरकार काम करती थी (जैसे टेलिकॉम, उड्डयन), उन्हें निजी क्षेत्र (Private Sector) के लिए खोल दिया गया।
- 3. वैश्वीकरण (Globalization): इसका उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया से जोड़ना था। आयात कर (Custom Duties) को भारी मात्रा में घटा दिया गया। विदेशी कंपनियों (MNCs) को भारत में पैसा लगाने (FDI) की खुली छूट दी गई।
- अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: इसके कारण भारत की आर्थिक विकास दर (Growth Rate) तेजी से बढ़ी, IT सेक्टर का भारी विकास हुआ और उपभोक्ताओं को सस्ती और अच्छी क्वालिटी की चीजें मिलने लगीं।
4. भारत के विकास के लिए हाल ही में शुरू की गई प्रमुख पहलों: मनरेगा (MGNREGA), मेक इन इंडिया और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
- प्रस्तावना: भारत सरकार ने हाल के वर्षों में गरीबी दूर करने, रोजगार बढ़ाने और औद्योगीकरण के लिए कई बड़ी योजनाएं (Recent Initiatives) शुरू की हैं।
- 1. मनरेगा (MGNREGA): * यह दुनिया का सबसे बड़ा ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम है। यह कोई दान नहीं, बल्कि काम मांगने का ‘कानूनी अधिकार’ है।
- फायदे: इसने गांवों से शहरों की तरफ होने वाले पलायन (Migration) को रोका है और महिलाओं के हाथों में सीधे पैसा पहुँचाकर उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाया है।
- 2. मेक इन इंडिया (Make in India):
- इसे 2014 में शुरू किया गया था। उद्देश्य: भारत को दुनिया का ‘मैन्युफैक्चरिंग हब’ (Manufacturing Hub) बनाना।
- कार्यप्रणाली: इसके तहत 25 अहम सेक्टर्स (जैसे ऑटोमोबाइल, रक्षा, आईटी) की पहचान की गई है जहाँ विदेशी निवेश (FDI) की प्रक्रिया को बहुत आसान (Ease of Doing Business) बना दिया गया है।
- 3. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY):
- भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है, लेकिन उनमें ‘कौशल’ (Skills) की भारी कमी है।
- इस योजना के तहत युवाओं को उनकी रुचि के अनुसार कंप्यूटर, सिलाई, मशीनरी आदि का फ्री ट्रेनिंग (Short term training) दी जाती है और कोर्स पूरा करने पर सरकार की तरफ से इनाम के तौर पर कुछ पैसा और एक पक्का सर्टिफिकेट दिया जाता है, जिससे उन्हें नौकरी मिलने में आसानी हो।
5. भारतीय अर्थव्यवस्था में ‘सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों’ (MSME) की भूमिका और महत्व को समझाते हुए, उनके सामने आने वाली प्रमुख समस्याओं का विश्लेषण कीजिए।
- प्रस्तावना: MSME (Micro, Small and Medium Enterprises) को भारतीय अर्थव्यवस्था की ‘रीढ़ की हड्डी’ कहा जाता है। खादी ग्रामोद्योग, अगरबत्ती बनाना, छोटे पुर्जे बनाने के कारखाने- ये सब MSME के अंतर्गत आते हैं।
- MSME का महत्व (Importance):
- रोजगार सृजन: भारत में कृषि के बाद MSME सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार देता है, क्योंकि इनमें मशीनों से ज्यादा हाथों से काम (Labour Intensive) होता है।
- निर्यात में योगदान: भारत के कुल निर्यात का लगभग 40% से ज्यादा हिस्सा इन छोटे उद्योगों से ही आता है (जैसे हस्तशिल्प, चमड़े का सामान, कपड़े)।
- क्षेत्रीय समानता: ये उद्योग गांवों और छोटे कस्बों में लगाए जा सकते हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों का विकास होता है।
- MSME के सामने प्रमुख समस्याएं (Major Problems):
- वित्त (Finance) की कमी: छोटे उद्योगों के पास अपनी संपत्ति नहीं होती, इसलिए बैंक उन्हें जल्दी लोन नहीं देते। वे साहूकारों के भारी ब्याज तले दब जाते हैं।
- पुरानी तकनीक: बड़े उद्योगों की तरह इनके पास आधुनिक मशीनें खरीदने का पैसा नहीं होता, जिससे इनके उत्पादों की क्वालिटी और स्पीड कम रहती है।
- मार्केटिंग की समस्या: ये अपना माल बनाने के बाद उसे बड़े बाजारों में बेचने या उसका विज्ञापन करने में बड़ी कंपनियों का मुकाबला नहीं कर पाते।
6. भारतीय अर्थव्यवस्था में ‘कृषि’ (Agriculture) की भूमिका और महत्व का सविस्तार वर्णन कीजिए। भारत में कृषि क्षेत्र की प्रमुख नीतियों और इसके प्रदर्शन का मूल्यांकन कीजिए।
- प्रस्तावना: भारत को गांवों और कृषि का देश कहा जाता है। औद्योगिक विकास के बावजूद, आज भी कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की धुरी बनी हुई है।
- कृषि की भूमिका और महत्व:
- रोजगार का सबसे बड़ा साधन: वर्तमान में भारत की लगभग 45% से अधिक कार्यशील आबादी अपनी आजीविका के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि और पशुपालन पर निर्भर है।
- राष्ट्रीय आय (GDP) में योगदान: हालांकि समय के साथ GDP में इसका हिस्सा घटा है, फिर भी यह लगभग 17-18% का अहम योगदान देती है।
- खाद्य सुरक्षा (Food Security): 140 करोड़ की विशाल आबादी का पेट भरने के लिए खाद्यान्न (गेहूं, चावल, दालें) कृषि से ही प्राप्त होता है।
- उद्योगों के लिए कच्चा माल: सूती वस्त्र, चीनी, और जूट जैसे प्रमुख भारतीय उद्योग पूरी तरह से कृषि द्वारा दिए गए कच्चे माल पर निर्भर हैं।
- प्रमुख नीतियां और प्रदर्शन:
- नीतियां: सरकार ने कृषि विकास के लिए हरित क्रांति (Green Revolution), न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और सिंचाई योजनाएं लागू की हैं।
- प्रदर्शन का मूल्यांकन: इन नीतियों के कारण भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बन गया है। हालांकि, कृषि का प्रदर्शन आज भी काफी हद तक मानसून पर निर्भर करता है। छोटी जोत (जमीन के छोटे टुकड़े) और कर्ज के कारण किसानों की आत्महत्या आज भी कृषि क्षेत्र की सबसे बड़ी विफलता है।
7. भारतीय अर्थव्यवस्था में ‘उद्योगों’ (Industry) की भूमिका स्पष्ट कीजिए। ‘नई औद्योगिक नीति 1991’ (New Industrial Policy 1991) के प्रमुख लक्ष्यों और विशेषताओं का विस्तृत विश्लेषण कीजिए।
- प्रस्तावना: किसी भी देश के तेज आर्थिक विकास और आधुनिकीकरण के लिए मजबूत औद्योगिक ढांचे का होना अनिवार्य है।
- अर्थव्यवस्था में उद्योगों की भूमिका:
- यह कृषि क्षेत्र के अतिरिक्त मजदूरों को रोजगार देकर कृषि पर बोझ कम करता है।
- मशीनें, ट्रैक्टर और खाद बनाकर यह कृषि के विकास में भी मदद करता है। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा कमाने के लिए औद्योगिक वस्तुओं का निर्यात बहुत जरूरी है।
- नई औद्योगिक नीति 1991 के लक्ष्य और विशेषताएँ:
- लाइसेंस राज की समाप्ति: इसका सबसे बड़ा लक्ष्य उद्योगों को लालफीताशाही (Bureucracy) से मुक्त करना था। केवल कुछ खतरनाक और सामरिक महत्व के उद्योगों (जैसे शराब, रक्षा उपकरण) को छोड़कर बाकी सभी के लिए लाइसेंस लेना खत्म कर दिया गया।
- सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector) की भूमिका में कमी: पहले बहुत से उद्योग केवल सरकार लगा सकती थी। इस नीति के तहत सरकार ने अपने आरक्षित उद्योगों की संख्या घटा दी और निजी क्षेत्र (Private companies) को काम करने की छूट दी।
- विदेशी निवेश (FDI) को मंजूरी: विदेशी कंपनियों को भारत में पैसा लगाने और 51% या उससे अधिक शेयर खरीदने की अनुमति दी गई, ताकि देश में नई तकनीक (Technology) आ सके।
8. ‘विदेशी व्यापार’ (Foreign Trade) से आप क्या समझते हैं? भारत के विदेशी व्यापार की ‘रचना’ (Composition) और ‘दिशा’ (Direction) में आए बदलावों की विवेचना कीजिए।
- प्रस्तावना: जब दो या दो से अधिक देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का लेन-देन (आयात और निर्यात) होता है, तो उसे विदेशी व्यापार कहते हैं।
- विदेशी व्यापार की रचना (Composition of Foreign Trade):
- ’रचना’ का अर्थ है कि हम कौन-सी वस्तुएं मंगा रहे हैं और कौन-सी बेच रहे हैं।
- स्वतंत्रता के समय: भारत केवल कच्चे माल (कपास, चाय, मसाले) का निर्यात करता था और बनी हुई मशीनों व कपड़ों का आयात करता था।
- वर्तमान स्थिति: आज भारत के निर्यात की रचना पूरी तरह बदल चुकी है। अब भारत सॉफ्टवेयर सेवाएं (IT), दवाइयां (Pharma), रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद, और इंजीनियरिंग के सामान का भारी निर्यात करता है। वहीं आयात में कच्चा तेल (Crude Oil), सोना (Gold), और इलेक्ट्रॉनिक सामान सबसे ऊपर हैं।
- विदेशी व्यापार की दिशा (Direction of Foreign Trade):
- ’दिशा’ का अर्थ है कि हम किन देशों के साथ व्यापार कर रहे हैं।
- आजादी के समय भारत का सबसे ज्यादा व्यापार केवल ब्रिटेन (UK) के साथ होता था। लेकिन आज भारत की दिशा बदल गई है।
- वर्तमान में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार अमेरिका (USA), चीन (China), और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) हैं। अब भारत यूरोप के बजाय एशिया और मध्य-पूर्व के देशों के साथ ज्यादा व्यापार कर रहा है।
9. भारत की ‘विदेशी व्यापार नीति’ (Foreign Trade Policy) के महत्व, प्रमुख उद्देश्यों और वर्तमान विशेषताओं का सविस्तार वर्णन कीजिए।
- प्रस्तावना: किसी भी देश के आयात-निर्यात को सुचारू रूप से चलाने और उसे बढ़ावा देने के लिए सरकार जो नियम और दिशानिर्देश बनाती है, उसे विदेशी व्यापार नीति कहा जाता है।
- विदेशी व्यापार नीति का महत्व:
- यह देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को बढ़ाने में मदद करती है।
- इसके जरिए देश में ‘बैलेंस ऑफ पेमेंट’ (भुगतान संतुलन) को ठीक रखा जाता है और घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाया जाता है।
- प्रमुख उद्देश्य:
- वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी (Share) को बढ़ाना।
- निर्यातकों को टैक्स में छूट और सब्सिडी देकर निर्यात (Exports) को अधिक लाभदायक बनाना।
- व्यापार करने की प्रक्रिया (Ease of Doing Business) को आसान बनाना और पेपरवर्क कम करना।
- वर्तमान नीति की विशेषताएँ:
- नई नीतियों में ‘ई-कॉमर्स निर्यात’ (E-commerce Exports) को भारी बढ़ावा दिया जा रहा है।
- ’रुपये’ (INR) में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार करने पर जोर दिया जा रहा है ताकि डॉलर पर निर्भरता कम हो सके।
- ’MSME’ और छोटे निर्यातकों के लिए अलग से सहायता योजनाएं लागू की गई हैं।
10. ‘राजकोषीय नीति’ (Fiscal Policy) और ‘मौद्रिक नीति’ (Monetary Policy) की अवधारणाओं को समझाइए। इसके साथ ही ‘स्टार्ट-अप इंडिया’ (Start Up India) और ‘NRLM’ (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) की संक्षिप्त विवेचना कीजिए।
- राजकोषीय नीति (Fiscal Policy):
- यह भारत सरकार (वित्त मंत्रालय) की नीति है। इसके मुख्य उपकरण हैं- सरकारी खर्च, कर (Taxation), और सार्वजनिक ऋण (Public Debt)। मंदी के समय सरकार अपना खर्च बढ़ा देती है और टैक्स कम कर देती है ताकि लोगों के पास पैसा आए।
- मौद्रिक नीति (Monetary Policy):
- यह देश के केंद्रीय बैंक (Reserve Bank of India – RBI) की नीति है। इसके जरिए बाजार में मुद्रा की पूर्ति (Money Supply) और ब्याज दरों को नियंत्रित किया जाता है। महंगाई बढ़ने पर RBI ब्याज दरें (Repo Rate) बढ़ा देता है ताकि लोग कम लोन लें और महंगाई कम हो।
- स्टार्ट-अप इंडिया (Start Up India Scheme):
- यह नए और इनोवेटिव बिजनेस आइडिया (Start-ups) वाले युवाओं को बढ़ावा देने की योजना है। इसके तहत सरकार युवाओं को 3 साल तक टैक्स में छूट, आसान फंडिंग और बिना जटिल नियमों के अपना व्यापार शुरू करने की सुविधा देती है, ताकि वे ‘जॉब सीकर’ (नौकरी मांगने वाले) की जगह ‘जॉब क्रिएटर’ (नौकरी देने वाले) बनें।
- NRLM (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन / आजीविका):
- यह ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक बहुत बड़ी योजना है जिसका उद्देश्य गांवों से गरीबी को जड़ से खत्म करना है।
- इसके तहत गांव की गरीब महिलाओं को ‘स्वयं सहायता समूहों’ (Self Help Groups – SHGs) में जोड़ा जाता है और उन्हें बैंक से लोन और ट्रेनिंग दिलाकर छोटे स्वरोजगार (जैसे सिलाई, पापड़ बनाना, मुर्गी पालन) शुरू करने में मदद की जाती है।