MDSU B.A. 6th Semester Economics Important Questions & Answers

MDSU B.A. 3rd Year Semester 6th Economics (सांख्यिकी, राजस्थान की अर्थव्यवस्था, और विकास का अर्थशास्त्र) important questions and answers in Hindi. Read 50-word short notes and 400-word study headings to score full marks in your university exams.

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MDSU B.A. 6th Semester Economics Important Questions & Answers (सांख्यिकी, राजस्थान की अर्थव्यवस्था, और विकास का अर्थशास्त्र)

MDSU Ajmer BA 3rd Year (Semester-6) Economics के महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर यहाँ उपलब्ध हैं। ये सभी प्रश्न परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों के आधार पर तैयार किए गए हैं। छात्र इन प्रश्नों को पढ़कर अपनी परीक्षा की तैयारी को और बेहतर बना सकते हैं।

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भाग-अ: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Part-A: Short Answers)

निर्देश: प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 50 शब्दों में दें। प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का है।

भाग-ब: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Part-B: Descriptive Questions – Study Notes)

निर्देश: इन प्रश्नों के उत्तर 400 शब्दों में दें। प्रत्येक प्रश्न 10 अंक का है। परीक्षा में पूरे अंक प्राप्त करने के लिए उत्तर में निम्नलिखित शीर्षकों का प्रयोग करें:

1. ‘आर्थिक वृद्धि’ (Economic Growth) और ‘आर्थिक विकास’ (Economic Development) में मुख्य अंतर क्या है?

आर्थिक वृद्धि का अर्थ केवल देश की राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय (पैसा) बढ़ने से है। जबकि आर्थिक विकास का अर्थ आय बढ़ने के साथ-साथ समाज में शिक्षा, स्वास्थ्य, और लोगों के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार होना है।

2. ‘गरीबी का दुष्चक्र’ (Vicious Circle of Poverty) क्या है?

प्रो. नर्क्से (Ragnar Nurkse) के अनुसार, “एक देश गरीब है क्योंकि वह गरीब है।” इसका अर्थ है कि गरीब देश में आय कम होती है, जिससे बचत कम होती है, बचत कम होने से निवेश कम होता है, और निवेश कम होने से उत्पादन फिर कम रहता है, जिससे देश हमेशा गरीब बना रहता है।

3. मानव विकास सूचकांक (HDI) क्या है?

मानव विकास सूचकांक (Human Development Index) किसी देश के आर्थिक और सामाजिक विकास को मापने का एक पैमाना है। इसके तीन मुख्य आधार हैं: 1. लंबा और स्वस्थ जीवन (Health), 2. शिक्षा (Education), और 3. सम्मानजनक जीवन स्तर (Income)।

4. राजस्थान की अर्थव्यवस्था में ‘पर्यटन’ (Tourism) का क्या महत्व है?

पर्यटन राजस्थान की अर्थव्यवस्था का एक बहुत बड़ा हिस्सा है। यह लाखों लोगों (जैसे गाइड, होटल कर्मचारी, हस्तशिल्प व्यापारी) को सीधा रोजगार देता है और राज्य सरकार के लिए विदेशी मुद्रा तथा आय (Tax) कमाने का एक मुख्य स्रोत है।

5. प्राथमिक आंकड़े (Primary Data) और द्वितीयक आंकड़े (Secondary Data) में क्या अंतर है?

प्राथमिक आंकड़े वे होते हैं जिन्हें शोधकर्ता पहली बार स्वयं फील्ड में जाकर (सर्वेक्षण या इंटरव्यू द्वारा) इकट्ठा करता है। द्वितीयक आंकड़े वे होते हैं जो पहले से ही किसी सरकारी रिपोर्ट, अखबार या किताब में छपे होते हैं और शोधकर्ता उनका उपयोग करता है।

6. सांख्यिकी में ‘सहसंबंध’ (Correlation) का क्या अर्थ है?

जब दो या दो से अधिक चर (Variables) में इस प्रकार का संबंध हो कि एक में परिवर्तन होने पर दूसरे में भी परिवर्तन हो जाए, तो उसे सहसंबंध कहते हैं। उदाहरण: बारिश की मात्रा और फसल के उत्पादन के बीच का संबंध।

7. ‘सूचकांक’ (Index Numbers) क्या होते हैं?

सूचकांक ऐसे सांख्यिकीय पैमाने हैं जो समय के साथ किसी वस्तु की कीमत, उत्पादन या मात्रा में होने वाले औसत परिवर्तन को मापते हैं। (जैसे थोक मूल्य सूचकांक जो महंगाई को मापता है)।

8. राजस्थान में RIICO (रीको) का मुख्य कार्य क्या है?

RIICO (राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम) राजस्थान में औद्योगिक विकास की सबसे बड़ी संस्था है। इसका मुख्य काम नए औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Areas) बनाना, जमीन देना और उद्यमियों को आर्थिक तथा तकनीकी सहायता प्रदान करना है।

9. ‘ग्रामीण उद्यमिता’ (Rural Entrepreneurship) से आप क्या समझते हैं?

ग्रामीण उद्यमिता का अर्थ है गांव के संसाधनों (जैसे कृषि उपज, हस्तशिल्प) का उपयोग करके गांव में ही कोई नया व्यवसाय या कुटीर उद्योग शुरू करना। इससे ग्रामीण लोगों को गांव में ही रोजगार मिलता है और उनका शहरों की तरफ पलायन रुकता है।

10. राजस्थान की जनसांख्यिकीय (Demographic) विशेषताएं क्या हैं?

राजस्थान क्षेत्रफल में भारत का सबसे बड़ा राज्य है, लेकिन यहाँ जनसंख्या का घनत्व (Density) कम है। यहाँ साक्षरता दर (विशेषकर महिला साक्षरता) राष्ट्रीय औसत से कम है और शिशु मृत्यु दर अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।

​भाग-ब: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (परीक्षा के लिए मुख्य अध्ययन बिंदु)

निर्देश: इन प्रश्नों के उत्तर 400 शब्दों में दें। प्रत्येक प्रश्न 10 अंक का है।

1. [विकास का अर्थशास्त्र] अल्पविकसित (Underdeveloped) देशों की प्रमुख आर्थिक और सामाजिक विशेषताओं का सविस्तार वर्णन कीजिए।

  • प्रस्तावना: जो देश अपनी प्राकृतिक और मानवीय संपदा का पूरा उपयोग नहीं कर पाए हैं और जहाँ प्रति व्यक्ति आय बहुत कम है, उन्हें अल्पविकसित या विकासशील देश कहा जाता है।
  • प्रमुख आर्थिक विशेषताएं:
    • कृषि पर भारी निर्भरता: इन देशों की 50% से 70% तक आबादी रोजगार के लिए केवल कृषि पर निर्भर होती है, लेकिन खेती के पुराने तरीकों के कारण कृषि से आय बहुत कम होती है।
    • पूंजी की भारी कमी: लोगों की आमदनी कम होने के कारण बचत नहीं हो पाती। बचत न होने से कल-कारखानों में निवेश (Capital Formation) नहीं हो पाता, जो विकास के लिए सबसे जरूरी है।
    • तकनीकी पिछड़ापन: उद्योगों और कृषि में आज भी पुरानी मशीनों और औजारों का प्रयोग होता है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और गति बहुत धीमी रहती है।
  • सामाजिक और जनसांख्यिकीय विशेषताएं:
    • जनसंख्या विस्फोट: इन देशों में मृत्यु दर तो कम हो गई है, लेकिन जन्म दर आज भी बहुत ऊँची है, जिससे जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है और संसाधनों पर बोझ पड़ रहा है।
    • बेरोजगारी और गरीबी: छिपी हुई बेरोजगारी (कृषि में जरूरत से ज्यादा लोगों का काम करना) और भयंकर गरीबी इन देशों की सबसे बड़ी समस्या है।
    • शिक्षा और स्वास्थ्य का अभाव: साक्षरता दर कम होती है और कुपोषण तथा बीमारियों के कारण लोगों की काम करने की क्षमता कम हो जाती है।

2. [विकास का अर्थशास्त्र] आर्थिक विकास के ‘संतुलित विकास’ (Balanced Growth) और ‘असंतुलित विकास’ (Unbalanced Growth) सिद्धांतों की तुलनात्मक व्याख्या कीजिए।

  • प्रस्तावना: गरीब देशों को तेजी से विकास करने के लिए अर्थशास्त्रियों ने दो अलग-अलग रणनीतियां बताई हैं: संतुलित विकास (प्रो. नर्क्से) और असंतुलित विकास (प्रो. हर्षमैन)।
  • संतुलित विकास का सिद्धांत (Balanced Growth):
    • ​प्रो. नर्क्से के अनुसार, एक गरीब देश को अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों (जैसे कृषि, उद्योग, परिवहन, संचार) में एक साथ भारी निवेश करना चाहिए।
    • फायदा: जब सभी उद्योगों का एक साथ विकास होगा, तो एक उद्योग में काम करने वाले मजदूर दूसरे उद्योग का सामान खरीदेंगे। इससे बाजार में हर चीज की ‘मांग’ पैदा होगी और ‘गरीबी का दुष्चक्र’ टूट जाएगा।
    • आलोचना: गरीब देशों के पास इतना भारी पैसा (पूंजी) एक साथ मौजूद नहीं होता कि वे हर क्षेत्र में एक साथ निवेश कर सकें।
  • असंतुलित विकास का सिद्धांत (Unbalanced Growth):
    • ​प्रो. हर्षमैन (Hirschman) का मानना था कि गरीब देशों के पास पैसा बहुत कम होता है।
    • ​इसलिए उन्हें सभी जगह एक साथ पैसा नहीं लगाना चाहिए। उन्हें जानबूझकर अर्थव्यवस्था में ‘असंतुलन’ पैदा करना चाहिए।
    • तरीका: सरकार को केवल कुछ प्रमुख और सबसे महत्वपूर्ण उद्योगों (Core Industries जैसे बिजली, लोहा और सड़कें) में सारा पैसा लगाना चाहिए।
    • फायदा: जब बिजली और सड़कें बन जाएंगी, तो बाकी छोटे उद्योग (कपड़ा, सीमेंट) अपने आप प्राइवेट कंपनियों द्वारा लगा लिए जाएंगे। इसे ‘श्रृंखला प्रभाव’ (Linkage effect) कहते हैं। यह तरीका गरीब देशों के लिए अधिक व्यावहारिक है।

3. [राजस्थान की अर्थव्यवस्था] राजस्थान की अर्थव्यवस्था में ‘कृषि’ (Agriculture) की भूमिका और महत्व को समझाइए। राज्य में कृषि विकास के मार्ग में आने वाली प्रमुख बाधाओं (Constraints) का वर्णन कीजिए।

  • प्रस्तावना: राजस्थान एक रेगिस्तानी और सूखा राज्य होने के बावजूद, यहाँ की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि और पशुपालन (Animal Husbandry) है।
  • कृषि का महत्व (Role of Agriculture):
    • रोजगार: राज्य की लगभग दो-तिहाई ग्रामीण आबादी रोजगार और आजीविका के लिए पूरी तरह खेती पर निर्भर है।
    • उद्योगों को कच्चा माल: राज्य के प्रमुख उद्योग जैसे सूती वस्त्र, चीनी, ग्वार गम और तेल मिलें कृषि से मिलने वाले कच्चे माल पर ही चलते हैं।
    • राजस्व और निर्यात: बाजरा, सरसों, ग्वार और मसालों (जैसे जीरा, धनिया) के उत्पादन में राजस्थान पूरे देश में नंबर वन है, जिसका भारी निर्यात किया जाता है।
  • कृषि के मार्ग में प्रमुख बाधाएं (Problems in Agriculture):
    • पानी की भारी कमी: राजस्थान में देश की कुल जमीन का 10.4% हिस्सा है, लेकिन सतह का पानी केवल 1% है। सिंचाई के साधनों की कमी खेती की सबसे बड़ी बाधा है।
    • मानसून पर निर्भरता: राज्य में बारिश बहुत कम और अनिश्चित होती है, जिससे हर दो-तीन साल में अकाल (Drought) पड़ता है।
    • जमीन का बंजरपन: थार के मरुस्थल के कारण उपजाऊ मिट्टी की कमी है और बची हुई जमीन भी लगातार खारे पानी से खराब हो रही है।
    • कृषि वित्त की समस्या: छोटे किसानों को आसानी से बैंक लोन नहीं मिल पाता, जिससे वे महाजनों के कर्ज जाल में फंस जाते हैं।

4. [राजस्थान की अर्थव्यवस्था] राजस्थान में औद्योगिक विकास (Industrial Development) की स्थिति का वर्णन कीजिए। राज्य के औद्योगीकरण में RIICO और RFC जैसी संस्थाओं की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।

  • प्रस्तावना: आजादी के समय राजस्थान औद्योगिक रूप से बिल्कुल पिछड़ा हुआ था। लेकिन आज खनिज आधारित (Mineral based) और कृषि आधारित उद्योगों के कारण राज्य ने अच्छी प्रगति की है।
  • प्रमुख उद्योग:
    • ​राज्य में सीमेंट उद्योग, मार्बल और ग्रेनाइट उद्योग, सूती वस्त्र, जेम्स एंड ज्वैलरी (रत्न एवं आभूषण) और हस्तशिल्प (Handicrafts) का भारी विकास हुआ है।
  • औद्योगिक विकास में संस्थाओं की भूमिका:
    • RIICO (राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम): यह राज्य की सबसे बड़ी संस्था है। यह खाली जमीन का अधिग्रहण करके वहां सड़कें, बिजली और पानी की सुविधा वाले बड़े ‘औद्योगिक क्षेत्र’ (Industrial Parks/SEZ) बनाती है और निवेशकों को सस्ती दरों पर जमीन देती है।
    • RFC (राजस्थान वित्त निगम): उद्योग लगाने के लिए करोड़ों रुपयों की जरूरत होती है। RFC नए और पुराने उद्योगों को मशीनें खरीदने और कारखाने लगाने के लिए दीर्घकालीन (Long-term) लोन और आर्थिक सहायता प्रदान करता है।
    • RAJSICO (राजसीको): यह संस्था राज्य के छोटे हस्तशिल्पियों (कारीगरों) और लघु उद्योगों के उत्पादनों (हैंडीक्राफ्ट) की मार्केटिंग करती है और उन्हें विदेश में बेचने (Export) में मदद करती है।

5. [सांख्यिकी – Statistics] ‘केंद्रीय प्रवृत्ति के मापों’ (Measures of Central Tendency) से आप क्या समझते हैं? माध्य (Mean), मध्यका (Median) और बहुलक (Mode) की परिभाषा और उनके उपयोगों की विस्तृत विवेचना कीजिए।

  • प्रस्तावना: सांख्यिकी में, जब हमारे पास बहुत सारे आंकड़े (Data) होते हैं, तो उन्हें समझने के लिए हम एक ऐसे अकेले अंक को ढूंढते हैं जो उन सभी आंकड़ों का सही प्रतिनिधित्व कर सके। इसे ही ‘केंद्रीय प्रवृत्ति की माप’ (औसत) कहा जाता है।
  • 1. समांतर माध्य (Mean):
    • परिभाषा: सभी आंकड़ों के योग (जोड़) में उनकी कुल संख्या का भाग देने पर जो अंक आता है, उसे माध्य कहते हैं। (जैसे 5 बच्चों के नंबर जोड़कर 5 का भाग देना)।
    • उपयोग: यह अर्थशास्त्र में सबसे ज्यादा उपयोग होता है (जैसे औसत आय, औसत उत्पादन निकालने में)।
    • फायदा: यह सभी आंकड़ों पर आधारित होता है और गणितीय रूप से बहुत सटीक होता है।
  • 2. मध्यका (Median):
    • परिभाषा: जब सभी आंकड़ों को आरोही (बढ़ते हुए) या अवरोही (घटते हुए) क्रम में जमाया जाए, तो बिल्कुल बीच (Center) में जो अंक आता है, उसे मध्यका कहते हैं। यह आंकड़ों को दो बराबर हिस्सों में बांट देती है।
    • उपयोग: जब आंकड़ों में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव (Extreme values) हो, तो वहां माध्य काम नहीं करता, वहां मध्यका से ही सही औसत निकाला जाता है (जैसे देश की गरीबी मापना)।
  • 3. बहुलक (Mode):
    • परिभाषा: किसी डेटा सेट में जो अंक सबसे ज्यादा बार (Maximum frequency) आता है, उसे बहुलक कहते हैं।
    • उपयोग: इसका उपयोग व्यापार और उद्योगों में बहुत होता है। जैसे जूतों की फैक्ट्री यह देखने के लिए ‘बहुलक’ का प्रयोग करती है कि बाजार में किस नंबर के जूते सबसे ज्यादा बिक रहे हैं, ताकि वह उसी नंबर के जूते ज्यादा बनाए।

6. [सांख्यिकी – Statistics] ‘अपकिरण’ (Dispersion) से आप क्या समझते हैं? ‘प्रमाप विचलन’ (Standard Deviation) का अर्थ बताते हुए इसके प्रमुख गुण और दोषों की विवेचना कीजिए।

  • प्रस्तावना: केवल ‘माध्य’ (औसत) निकाल लेना ही आंकड़ों को समझने के लिए काफी नहीं होता, क्योंकि दो अलग-अलग श्रेणियों का औसत एक समान हो सकता है। आंकड़े अपने औसत से कितनी दूर फैले हुए हैं या बिखरे हुए हैं, इस फैलाव (Scattering) को मापने को ही ‘अपकिरण’ (Dispersion) कहते हैं।
  • प्रमाप विचलन (Standard Deviation) का अर्थ:
    • ​इसे कार्ल पियर्सन (Karl Pearson) ने 1893 में प्रस्तुत किया था। अपकिरण को मापने का यह सबसे वैज्ञानिक और सबसे उत्तम तरीका है।
    • ​प्रमाप विचलन किसी श्रेणी के समांतर माध्य (Mean) से निकाले गए विचलनों (Deviations) के वर्गों (Squares) के औसत का ‘वर्गमूल’ (Square root) होता है। इसे ग्रीक अक्षर सिग्मा (σ) से दर्शाया जाता है।
  • प्रमाप विचलन के गुण (Merits):
    • बीजगणितीय शुद्धता: ‘माध्य विचलन’ (Mean Deviation) में प्लस (+) और माइनस (-) के चिह्नों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन प्रमाप विचलन में संख्याओं का वर्ग (Square) किया जाता है, जिससे माइनस अपने आप प्लस में बदल जाता है। यह इसे गणितीय रूप से शुद्ध बनाता है।
    • सभी मूल्यों पर आधारित: यह श्रेणी के प्रत्येक पद (Item) पर आधारित होता है।
  • दोष (Demerits):
    • ​इसकी गणना करना (वर्गमूल निकालना) आम आदमी के लिए थोड़ा कठिन और लंबा काम है।
    • ​इसमें बहुत बड़े और चरम मूल्यों (Extreme values) को बहुत ज्यादा महत्व मिल जाता है, जिससे कभी-कभी नतीजे प्रभावित हो जाते हैं।

7. [सांख्यिकी – Statistics] ‘सूचकांक’ (Index Numbers) क्या होते हैं? सूचकांक निर्माण की प्रमुख समस्याएं क्या हैं? ‘फिशर के सूचकांक’ (Fisher’s Ideal Index) को आदर्श क्यों माना जाता है?

  • प्रस्तावना: सूचकांक (Index Numbers) वे सांख्यिकीय पैमाने हैं जो समय, स्थान या स्थिति के साथ किसी चर (जैसे महंगाई, उत्पादन) में होने वाले परिवर्तनों को मापते हैं। (उदाहरण: शेयर बाजार का सेंसेक्स या थोक मूल्य सूचकांक)।
  • सूचकांक निर्माण की प्रमुख समस्याएं:
    • आधार वर्ष का चुनाव (Base Year): सबसे बड़ी समस्या यह चुनना है कि किस वर्ष से तुलना की जाए। आधार वर्ष एक सामान्य वर्ष होना चाहिए (जिसमें युद्ध या अकाल न पड़ा हो)।
    • वस्तुओं का चुनाव: बाजार में हजारों वस्तुएं हैं, सूचकांक में केवल उन्हीं वस्तुओं को चुनना चाहिए जो आम जनता के काम आती हैं।
    • कीमतों का चुनाव: थोक कीमतें (Wholesale price) ली जाएं या खुदरा कीमतें (Retail price), यह तय करना बहुत मुश्किल होता है।
  • फिशर का आदर्श सूचकांक (Fisher’s Ideal Index Number):
    • ​अर्थशास्त्री इरविंग फिशर के सूचकांक को सबसे ‘आदर्श’ माना जाता है।
    • कारण: 1. यह ‘लास्पेयर’ (Laspeyres) और ‘पाशे’ (Paasche) के सूचकांकों का ‘गुणोत्तर माध्य’ (Geometric Mean) है। 2. यह वर्तमान वर्ष और आधार वर्ष दोनों की ‘मात्राओं’ (Quantities) को भार (Weight) देता है। 3. यह समय उत्क्राम्यता परीक्षण (Time Reversal Test) और तत्व उत्क्राम्यता परीक्षण (Factor Reversal Test) दोनों को पूरी तरह संतुष्ट करता है।

8. [विकास का अर्थशास्त्र] डब्ल्यू. डब्ल्यू. रोस्टोव (W. W. Rostow) के ‘आर्थिक विकास की अवस्थाओं’ (Stages of Economic Growth) के सिद्धांत का सविस्तार वर्णन कीजिए।

  • प्रस्तावना: अमेरिकी अर्थशास्त्री डब्ल्यू. डब्ल्यू. रोस्टोव ने 1960 में आर्थिक विकास का एक ऐतिहासिक और बहुत प्रसिद्ध सिद्धांत दिया। उनके अनुसार, दुनिया का कोई भी देश जब विकास करता है, तो उसे पांच अवस्थाओं (Stages) से होकर गुजरना पड़ता है।
  • रोस्टोव की 5 अवस्थाएं:
    • 1. पारंपरिक समाज (Traditional Society): यह सबसे पिछड़ी अवस्था है। इसमें समाज कृषि पर निर्भर होता है, उत्पादन की तकनीक पुरानी होती है, और लोगों का नज़रिया अंधविश्वासों से भरा होता है। (जैसे अंग्रेजों के आने से पहले का भारत)।
    • 2. आत्म-स्फूर्ति के पूर्व की अवस्था (Pre-conditions for Take-off): इस अवस्था में बदलाव शुरू होते हैं। बैंक खुलते हैं, शिक्षा का प्रसार होता है, परिवहन (रेल, सड़कें) बनता है और लोग नया व्यापार शुरू करने के लिए आगे आते हैं।
    • 3. आत्म-स्फूर्ति की अवस्था (Take-off Stage): यह विकास की सबसे महत्वपूर्ण छलांग है (जैसे हवाई जहाज का रनवे से उड़ना)। इसमें देश का निवेश (Investment) 5% से बढ़कर 10% से ऊपर हो जाता है और नए बड़े उद्योग स्थापित हो जाते हैं। अर्थव्यवस्था अपने पैरों पर खड़ी हो जाती है।
    • 4. परिपक्वता की ओर अग्रसर (Drive to Maturity): ‘टेक-ऑफ’ के करीब 40-50 साल बाद यह अवस्था आती है। देश में नई और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होता है और अर्थव्यवस्था दुनिया के बाजारों में अपनी जगह बना लेती है।
    • 5. अत्यधिक जन-उपभोग की अवस्था (Age of High Mass Consumption): यह विकास की अंतिम और सबसे ऊँची अवस्था है (जैसे आज का अमेरिका)। इसमें लोगों की आय इतनी ज्यादा हो जाती है कि वे भोजन के बजाय लग्जरी चीजें (कार, एसी, विदेश यात्रा) ज्यादा खरीदते हैं।

9. [विकास का अर्थशास्त्र] आर्थर लुईस (Arthur Lewis) के ‘श्रम की असीमित पूर्ति’ (Unlimited Supply of Labour) के सिद्धांत की विस्तृत व्याख्या कीजिए।

  • प्रस्तावना: नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री डब्ल्यू. आर्थर लुईस ने 1954 में अल्पविकसित देशों (जैसे भारत) के विकास के लिए यह प्रसिद्ध सिद्धांत दिया।
  • सिद्धांत का मुख्य आधार: लुईस का मानना था कि गरीब देशों में जनसंख्या बहुत अधिक होती है और खेती में जरूरत से ज्यादा लोग लगे होते हैं (छिपी हुई बेरोजगारी)। यदि इन अतिरिक्त मजदूरों को खेती से हटा भी दिया जाए, तो भी खेती के उत्पादन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसे ही ‘श्रम की असीमित पूर्ति’ कहा गया है।
  • अर्थव्यवस्था के दो क्षेत्र (Dual Economy):
    • ​लुईस ने अर्थव्यवस्था को दो भागों में बांटा: 1. निर्वाह क्षेत्र (Subsistence Sector): यह कृषि क्षेत्र है जहाँ श्रम बहुत ज्यादा है और मजदूरी केवल पेट भरने (निर्वाह) लायक मिलती है। 2. पूंजीवादी क्षेत्र (Capitalist Sector): यह आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र है, जहाँ मशीनों का प्रयोग होता है और लाभ कमाया जाता है।
  • विकास की प्रक्रिया:
    • ​विकास तब शुरू होता है जब पूंजीवादी क्षेत्र (उद्योग) कृषि क्षेत्र के अतिरिक्त और बेरोजगार मजदूरों को अपने कारखानों में नौकरी देता है।
    • ​चूँकि मजदूर बहुत ज्यादा हैं, इसलिए कारखाने के मालिक उन्हें बहुत कम मजदूरी देते हैं, जिससे मालिकों को भारी ‘पूंजीवादी अतिरेक’ (Capitalist Surplus / भारी मुनाफा) बचता है।
    • ​मालिक इस मुनाफे को फिर से नए कारखाने लगाने में निवेश करते हैं। यह चक्र तब तक चलता है जब तक कृषि क्षेत्र के सारे बेरोजगार मजदूर कारखानों में काम पर नहीं लग जाते। यही पूंजी निर्माण और आर्थिक विकास का आधार है।

10. [राजस्थान की अर्थव्यवस्था] राजस्थान की जनांकिकीय विशेषताओं (Demographic Features) पर प्रकाश डालिए। राज्य में ‘पर्यटन विकास’ (Tourism Development) और ‘फ्लैगशिप योजनाओं’ (Flagship Schemes) का मूल्यांकन कीजिए।

  • प्रस्तावना: राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य है। लेकिन इसकी भौगोलिक परिस्थितियों (रेगिस्तान) के कारण यहाँ की जनांकिकी (जनसंख्या के आंकड़े) और विकास की नीतियां अन्य राज्यों से अलग हैं।
  • राजस्थान की जनांकिकीय विशेषताएं:
    • जनसंख्या और घनत्व: राज्य की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन विशाल क्षेत्रफल के कारण यहाँ का ‘जनसंख्या घनत्व’ (200 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर) राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है।
    • लिंगानुपात और साक्षरता: राजस्थान में लिंगानुपात (विशेषकर शिशु लिंगानुपात) अभी भी चिंता का विषय है। महिला साक्षरता दर (लगभग 52%) भारत के कई राज्यों की तुलना में काफी पीछे है।
  • पर्यटन विकास (Tourism Development):
    • ​महलों, किलों और रेगिस्तानी सफारी के कारण राजस्थान एक वैश्विक पर्यटन हब है। पर्यटन को राजस्थान में ‘उद्योग’ का दर्जा दिया गया है।
    • ​यह राज्य को भारी विदेशी मुद्रा दिलाता है और परिवहन, होटल, तथा हैंडीक्राफ्ट से जुड़े लाखों युवाओं को सीधा रोजगार देता है। ‘पधारो म्हारे देश’ और ‘पैलेस ऑन व्हील्स’ ट्रेन पर्यटन विकास की अहम कड़ियां हैं।
  • प्रमुख सरकारी फ्लैगशिप योजनाएं:
    • ​आर्थिक विकास में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने कई ‘फ्लैगशिप योजनाएं’ (Flagship Schemes) चलाई हैं।
    • ​उदाहरण: ‘चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना’ (जिसने हर नागरिक को मुफ्त और बड़ा स्वास्थ्य कवर दिया), ‘इंदिरा रसोई योजना’ (सस्ता भोजन), और बालिकाओं की शिक्षा के लिए ‘गार्गी पुरस्कार’ जैसी योजनाएं। इन योजनाओं ने राजस्थान के मानव संसाधन विकास (HRD) में एक बड़ी और सकारात्मक भूमिका निभाई है।